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जहाज़पुर का नाम ‘यज्ञपुर’ करने के फैसले पर उठे सवाल, गरीब जनता पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ रिपोटर एजाज मोहम्मद


जहाज़पुर का नाम बदलकर ‘यज्ञपुर’ करने के प्रस्ताव को लेकर इलाके में बहस तेज हो गई है। जहां एक ओर कुछ लोग इसे सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक इस फैसले को गरीब जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ बता रहे हैं।
स्थानीय व्यापारियों और मजदूर वर्ग का कहना है कि नाम परिवर्तन के बाद सरकारी दस्तावेज, आधार कार्ड, राशन कार्ड, बैंक खाते, जमीन के कागजात, स्कूल प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेजों में संशोधन कराना पड़ेगा। इससे आम लोगों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ेंगे और आर्थिक खर्च भी उठाना होगा।
छोटे दुकानदारों का कहना है कि उन्हें अपनी दुकानों के बोर्ड, बिल बुक, पैकेजिंग सामग्री और अन्य प्रचार सामग्री बदलनी पड़ेगी, जिसका सीधा असर उनकी आमदनी पर पड़ेगा। पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए यह अतिरिक्त खर्च चिंता का विषय बन गया है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार को पहले क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं—रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी सुविधाओं—पर ध्यान देना चाहिए। उनका तर्क है कि नाम परिवर्तन से विकास के मुद्दे हल नहीं होंगे।
हालांकि कुछ संगठनों ने इस कदम का स्वागत भी किया है और इसे ऐतिहासिक एवं धार्मिक पहचान से जोड़कर देखा है। लेकिन विरोध करने वालों का कहना है कि किसी भी बड़े फैसले से पहले आम जनता की राय लेना जरूरी है।
फिलहाल नाम परिवर्तन को लेकर क्षेत्र में समर्थन और विरोध दोनों की आवाजें सुनाई दे रही हैं, और लोगों की नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है।

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