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चंद्रशेखर आज़ाद के बलिदान दिवस पर जनवादी लेखक संघ ने दी श्रद्धांजली



मेरठ - महान क्रांतिकारी और आजादों के आजाद चंद्रशेखर आजाद के 95वें बलिदान दिवस पर जनवादी लेखक संघ मेरठ ने फूल-मालाएं चढ़ा कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर चंद्रशेखर आजाद के बारे में बताते हुए जनवादी लेखक संघ के जिला मंत्री मुनेश त्यागी ने बताया कि हमारे देश में लाखों स्वतंत्रता सेनानी थे जिनमें आजाद का नाम सबसे पहले लिया जाता है। 1921 के असहयोग आन्दोलन के बाद, यही बालक बाद में पूरी दुनिया में चंद्रशेखर आजाद के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
चंद्रशेखर आजाद की अध्यक्षता में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन का नाम हिंदुस्तान समाजवादी गणतंत्र संघ रखा गया था। वे शोषण, अन्याय और अत्याचार से नफरत करते थे। वे अपने साथियों के पढ़ने लिखने पर बहुत जोर देते थे। उन्होंने दुनिया की सबसे पहली क्रांतिकारी किताब "कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो" भी अपने साथी शिव वर्मा से सुनकर जानी थी। चंद्रशेखर आजाद अपने को "समाजवादी" कहने पर बेहद फक्र महसूस करते थे और बहुत खुश होते थे। वे किसानों मजदूरों के राज की हिमायती थे और फासीवादी साम्राज्यवाद के सबसे बड़े दुश्मन थे।
हिंदुस्तान समाजवादी गणतंत्र संघ जिसके चंद्रशेखर आजाद अध्यक्ष थे, के उद्देश्य निम्न प्रकार थे,,,, सशस्त्र क्रांति द्वारा गणराज्य की स्थापना ,,,, शोषणकारी व्यवस्था का खात्मा ,,,विश्व में मेलजोल ,,,,किसानों मजदूरों की एकता ,,,,राष्ट्रीय मुक्ति के लिए क्रांति ,,,,प्राकृतिक संसाधनों पर सबका अधिकार ,,,,सारे हिंदुस्तानियों का विकास ,,,,पंचायती राज की स्थापना,,,, गुलामी का खात्मा ,,,,हिंदू मुस्लिम की एकता ,,,आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक असमानता का खात्मा। उन्होंने बताया कि हिंदुस्तान समाजवादी गणतांत्रिक संघ के नारे भी कमाल के थे जैसे साम्राज्यवाद मुर्दाबाद और इंकलाब जिंदाबाद।
इस अवसर पर बोलते हुए जनवादी लेखक संघ के जिला सहसचिव मंगल सिंह मंगल ने बताया कि चंद्रशेखर आजाद काकोरी कांड में शामिल थे। वे वैश्य अनाथालय मेरठ भी आए थे और रासना गांव के आश्रम में भी गए थे। उन्होंने बताया कि चंद्रशेखर आजाद का जन्म भावरा, मध्य प्रदेश में हुआ था। वे सतत चौकसी और सतर्कता के हामी थे। अपने सहयोगी की मुखबिरी के कारण अल्फ्रेड पार्क इलाहाबाद में 17 फरवरी 1931 को वे आजादी की रक्षा के लिए लडते हुए शहीद हो गए थे। वे एक स्पष्ट सिद्धांत वादी थे। उनका कहना था कि हमारा दल क्रांतिकारियों का दल है।
इस अवसर पर बोलते हुए सुरेश खेड़ा ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद एक ऐसा देश बनाना चाहते थे ,,,,,जहां न भूख हो, न नग्नता हो,,,, जहां न गरीबी हो ना अमीरी हो ,,,, जहां न जुल्म हों न अन्याय और अत्याचार हों ,,,,जहां प्रेम हो, एकता हो, समता और समानता हो, ,,,,जहां इंसाफ हो, आजादी हो, ,,, जहां सुंदरता हो और सब सुखी हो। इस अवसर पर फूल माला चढ़ाने वालों में मुनेश त्यागी, मंगल सिंह मंगल, सुरेंद्र खेड़ा, महक सिंह, परवेज आलम एडवोकेट आदि लेखक शामिल थे।

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