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डॉ. राम सजीवन निषाद राष्ट्रीय जनवादी पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष बने

लखनऊ ब्यूरो न्यूज।
राष्ट्रीय जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूबेदार मेजर अमर सिंह चौहान ने पूर्वांचल क्षेत्र के कद्दावर नेता डॉ. राम सजीवन निषाद को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। नए प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राम सजीवन निषाद अभी तक राष्ट्रीय जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) में वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष थे और उनके पास अभी मौजूदा समय में राष्ट्रीय महासचिव का अतिरिक्त प्रभार भी है। डॉ. राम सजीवन निषाद अयोध्या जिले के विकास खंड सोहावल क्षेत्र के कपासी के रहने वाले हैं। वह हड्डी एवं जोड़ रोग के चिकित्सक भी हैं। डॉ. राम सजीवन निषाद 2009 से राजनीति में हैं और वह गांव की समस्याओं को लेकर जन सूचना के तहत सितम्बर 2016 में जन सूचना आयोग में जिले के कई अधिकारियों को नामित करते हुए जन सूचना आयोग लखनऊ में खण्ड विकास अधिकारी सोहावल को कटघरे में खड़ा करके तलब किया था, तबसे वह क्षेत्र में उनकी चर्चाओं का बोलबाला ज्यादा तेज हुई है। श्री निषाद 2009 से कई प्रमुख अखबारों और न्यूज चैनलों पर जिला संवाददाता, छायाकार जैसे अहम पद पर रहते हुए काम किया है। वर्ष 2018 से 2023 तक भारत की नामी कंपनियों में बिजनेस पार्टनर बनकर काम किया है। श्री निषाद राष्ट्रीय जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) में मार्च 2023 से लगातार वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में रहते हुए अवध क्षेत्र में राष्ट्रीय जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) के संगठन को मजबूत करते रहे हैं। डॉ. राम सजीवन निषाद ने अयोध्या जिले के मिल्कीपुर विधानसभा सुरक्षित सीट के उपचुनाव में बहुत ही सूझ बूझ से अपना प्रत्याशी उतारकर पूरे चुनाव में मजबूती देने का काम किया था।राष्ट्रीय जनवादी पार्टी में उनकी सक्रियता और निष्ठा को देखते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष सूबेदार मेजर अमर सिंह चौहान ने उनको प्रदेश अध्यक्ष का अहम पद देकर पूरे प्रदेश में निषाद समाज को जनवादी विचार धारा से जोड़ने का मुहिम छेड़ा है। वैसे ही डॉ. राम सजीवन निषाद को पूर्वांचल क्षेत्र में निषाद समाज का प्रमुख खेवनहार कहा जाता है। श्री निषाद की पिछड़ी और दलित समाज में अच्छी पकड़ है इसलिए उनको जननायक भी कहा जाता है। राष्ट्रीय जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) उत्तर प्रदेश के नए प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राम सजीवन निषाद पर इस बार निषाद समाज की 17 उपजातियों को अनुसूचित में आरक्षण दिलाने के साथ साथ पिछड़े और दलितों के वंचित समाज का सम्मान बचाना भी इनके लिए कड़ा मुकाबला है।

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