*चावला की संघर्ष से सफलता की कहानी*
लक्ष्य प्राप्ति के लिए साहस, समर्पण और सकारात्मकता जरूरी. चावला
*उन्होंने न केवल स्वयं सफलता प्राप्त की, बल्कि हर वर्ग के युवाओं को भी अपने अनुभव और मार्गदर्शन से प्रेरित किया।*
*कानाराम चावला का प्रेरणादायक सफर*
की कहानी एक ऐसी मिसाल है जो युवाओं को प्रेरित कर सकती है।
*ग्रामीण डाक सेवक/डाकिया से वरिष्ठ डाक अधिकारी तक संघर्ष भरा सफर*
*संघर्ष की शुरुआत*
कानाराम चावला ने अपनी नौकरी की शुरुआत 1986 में (आनंदपुरा गांव)में ग्रामीण डाकिया/डाक सेवक के रूप में की। उस समय उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। *उनके पिताजी पेमाराम चावला , भेड़ की ऊन कतरने का काम करते थे*
एवं व माता पिता का सपना था कि कानाराम,राजकीय सेवा में शामिल होकर देश सेवा में योगदान दें और उच्च अधिकारी बनें। चावला ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और साथ ही साथ अपने परिवार का सहयोग करने के लिए *गलीचे बनाने का काम भी किया*
चावला का प्रारंभिक जीवन बहुत ही ज्यादा गरीबी में गुजरा है
*प्रमोशन और उपलब्धियां*
कानाराम की मेहनत और समर्पण का फल उन्हें 1996 में पोस्टमैन के रूप में प्रमोशन के रूप में मिला। इसके बाद 2014 में उन्हें निरीक्षक डाकघर मकराना में, वरिष्ठ डाक अधिदर्शक के पद पर प्रमोशन मिला। ,उन्होंने अपनी 40 वर्ष की गौरवान्वित राजकीय सेवाएं दीं और कई पुरस्कारों से सम्मानित हुए।
*समय-समय पर ग्रामीण डाकघरों में विभिन्न शिविर आयोजित किए*
कानाराम ने नियमित रूप से नावां कुचामन उपखंड स्तर के सभी गांवों में विभिन्न प्रकार के शिविरों का नेतृत्व करके *15 हजार से अधिक बालिकाओं के सुकन्या समृद्धि खाता खुलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई*
जेसै सुकन्या समृद्धि शिविर, महिला सम्मान निधि शिविर विभिन्न प्रकार के बचत शिविर,बाल आधार शिविर, बालिका शिक्षा मोटिवेशनल शिविर,बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ शिविर ,ग्रामीण व शहरी जीवन बीमा शिविर,घर घर तिरंगा अभियान शिविर आदि विभिन्न प्रकार के बार बार साप्ताहिक शिविरों का नेतृत्व करते थे, और ग्राम वासियों को बेहतर लाभ दिलाया और सरकारी योजनाएं बताईं।
*चावला औचक निरीक्षण का कार्य करते थे*
चावला प्रति तीन माह से , 45 गांवो के शाखा डाकघरों का औचक निरीक्षण करते थे व और ग्रामीणों की समस्याओं से अवगत होकर उनका उच्च अधिकारियों से तुरंत निस्तारण करवाते थे
*सम्मान और पुरस्कार*
कानाराम चावला को उनके राजकीय सेवाऔ के लिए कई सम्मान और पुरस्कार मिले हैं।संभाग स्तरीय पुरस्कार,व उन्हें पोस्टमास्टर जनरल, राजस्थान पश्चिम क्षेत्र जोधपुर से सम्मानित किया गया है।इसके अलावा, उन्हें नागौर जिला स्तर पर डाक अधीक्षक (SP) द्वारा 8 बार सम्मानित हो चुके हैं । व मकराना डाक निरीक्षक द्वारा, उपखंड स्तरीय पुरस्कार से भी कई बार सम्मानित हो चुके हैं
एवं
*उन्हें 45 गांवों के सरपंचों व भामाशाहों द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है।*
*प्रमुख स्थानांतरण*
चावला ने विभिन्न कार्यस्थलों पर सेवाएं दी हैं, जिनमें सर्वप्रथम कर्म स्थली , आनंदपुरा , मेड़ता सिटी , कुचामन, निरीक्षक डाकघर मकराना, कर्णू -नागौर आदि डाकघरों में सेवाएं दी
*सेवानिवृत्ति*
कानाराम चावला डाक अधिदर्शक की गौरवपूर्ण सेवानिवृत्ति शनिवार , 28 फरवरी 2026 को होंगे। उनकी सेवाएं भारतीय डाक विभाग के लिए एक बड़ी उपलब्धि हैं। उनकी कहानी युवाओं को प्रेरित करेगी और उन्हें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
*निष्कर्ष*
चावला की कहानी एक प्रेरणादायक उदाहरण है जो युवाओं को अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित कर सकती है। उनकी मेहनत, समर्पण सच्ची निष्ठा और सामाजिक कार्य ने उन्हें एक सच्चे नेता के रूप में स्थापित किया है। हमें उनकी सेवाओं का सम्मान करना चाहिए और उनकी कहानी से प्रेरणा लेनी चाहिए।
*चावला के जीवन के महत्वपूर्ण तथ्य*
चावला का जन्म 1 मार्च 1966 एक गरीब परिवार में हुआ था व चावला ने अपने जीवन में काफी कठोर परिश्रम किया है
... अपनी सम्पूर्ण शिक्षा राजकीय विद्यालयों से ही प्राप्त की
..चावला ने अपने जीवन काल में 100 से अधिक पेड़ पौधे लगाए व प्रकृति संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
चावला ने. *उतार चढ़ाव संसाधनों की कमी को कभी बाधा नहीं बनने दिया*