2 मार्च मध्यरात्रि होलिका दहन, ग्रहण के कारण एक दिन आगे बढ़ा रंगोत्सव”
कानपुर/लखनऊ। वर्ष 2026 में होलिका दहन शास्त्रीय नियमों के अनुसार 2 मार्च, सोमवार की रात्रि में संपन्न होगा। आचार्य डॉ अजय दीक्षित ने बताया कि होलिका दहन के लिए तीन प्रमुख नियम माने गए हैं— (1) फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि, (2) रात्रि का समय, तथा (3) भद्रा का समाप्त होना।
इस वर्ष 2 मार्च को सायं 5:18 बजे से फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तिथि प्रारंभ हो रही है और उसी समय से भद्रा भी लग रही है, जो भोर 4:56 बजे तक रहेगी। ऐसे में भद्रा मुख का त्याग कर भद्रा पुच्छ में रात्रि 11:53 बजे से 12:50 बजे तक होलिका दहन का शुभ मुहूर्त निर्धारित किया गया है।
शास्त्र वचन है—
“प्रदोष व्यापिनी ग्राह्या पौर्णिमा फाल्गुनी सदा।
तस्यां भद्रा मुखं त्यक्त्वा पूज्या होला निशामुखे।।“
अर्थात फाल्गुनी पूर्णिमा यदि प्रदोष काल में व्याप्त हो तो रात्रि के आरंभ में भद्रा मुख को त्यागकर होलिका पूजन एवं दहन करना चाहिए।
3 मार्च 2026, मंगलवार को फाल्गुनी पूर्णिमा तिथि सायं 4:33 बजे तक रहेगी। इसी दिन खग्रास चंद्रग्रहण भी घटित होगा, जो भारत में ग्रस्तोदय के रूप में दिखाई देगा। अर्थात चंद्रोदय से पूर्व ही ग्रहण प्रारंभ हो चुका होगा और भारत में मुख्यतः ग्रहण की समाप्ति का दृश्य ही देखा जा सकेगा।
ग्रहण का समय (भारतीय मानक समयानुसार):
ग्रहण स्पर्श प्रारंभ – 15:20 बजे
खग्रास प्रारंभ – 16:34 बजे
ग्रहण मध्य – 17:04 बजे
खग्रास समाप्त – 17:33 बजे
ग्रहण समाप्त – 18:47 बजे
भारत में स्थानीय चंद्रोदय के साथ ही ग्रहणारंभ माना जाएगा।
सूतक काल
ग्रहण का सूतक 3 मार्च प्रातः 6:20 बजे से प्रारंभ होगा। ग्रहण मोक्ष के उपरांत चंद्रबिंब के दर्शन एवं तर्पण करने के बाद ही अन्य धार्मिक कार्य करना शास्त्रसम्मत बताया गया है।
होली (धुरेड़ी) 4 मार्च को
ग्रहण एवं तिथि की स्थिति को देखते हुए इस वर्ष रंगोत्सव (धुरेड़ी) 4 मार्च, बुधवार को देशभर में मनाया जाएगा। काशी की परंपरा के अनुसार 3 मार्च को ग्रहण मोक्ष के बाद चौसट्ठी देवी के दर्शन-पूजन उपरांत अबीर-गुलाल अर्पित किया जाएगा।
आचार्य डॉ अजय दीक्षित
मो.9559986789