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फाल्गुन मास के आगमन के साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में होली की तैयारियाँ जोरों पर


संवाददाता (Santosh Kumar Bhatt), अल्मोड़ा

फाल्गुन मास के आगमन के साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में होली की तैयारियाँ जोरों पर हैं। परंपरा के अनुसार गाँव-गाँव में लोग चिर यानी लकड़ी, पत्ते और अन्य सामग्री इकट्ठा करने लगे हैं।

परंपरा और उत्साह
मंदिरों और चौक-चौराहों पर युवाओं की टोली चिर संग्रह में जुटी है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चे और महिलाएँ भी इस परंपरा में भाग ले रहे हैं।

माना जाता है कि चिर का बढ़ना होली के आगमन का संकेत है।

सामाजिक मेल-जोल का प्रतीक
स्थानीय निवासियों का कहना है कि चिर इकट्ठा करने की परंपरा केवल धार्मिक महत्व ही नहीं रखती, बल्कि यह सामाजिक मेल-जोल का भी प्रतीक है। लोग सामूहिक रूप से सामग्री जुटाते हैं और फिर होलिका दहन के दिन इसे जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाते हैं।

वातावरण में रंगों की गूंज
इस बार मौसम सुहावना होने के कारण चिर संग्रह में उत्साह और भी अधिक दिखाई दे रहा है। गाँव-शहरों में होली गीतों की गूंज और रंगों की तैयारी ने वातावरण को पहले ही उत्सवमय बना दिया है।

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