बिहार में निजी शिक्षण संस्थानों की फीस अब सरकार करेगी तय, विधेयक 2026 विधानसभा से पारित..
पटना। बिहार में निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों द्वारा ली जाने वाली मनमानी फीस पर अब रोक लगेगी। इसके लिए विधानसभा से बिहार निजी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थान (नामांकन विनियमन एवं शुल्क निर्धारण) विधेयक, 2026 पारित कर दिया गया है। इस कानून के तहत राज्य सरकार सभी निजी व्यावसायिक संस्थानों की नामांकन से लेकर परीक्षा तक की फीस तय करेगी।
उच्चस्तरीय समिति करेगी शुल्क निर्धारण
विधेयक के अनुसार एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाएगा, जो शिक्षण शुल्क, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, कंप्यूटर, कॉशन मनी, परीक्षा शुल्क और छात्रावास शुल्क सहित अन्य सभी मदों की फीस निर्धारित करेगी। समिति के अध्यक्ष प्रख्यात शिक्षाविद् या प्रधान सचिव से नीचे के पद पर नहीं रहे किसी सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी होंगे।
मनमानी वसूली पर सख्त कार्रवाई
अगर कोई संस्थान समिति द्वारा तय शुल्क से अधिक राशि वसूलता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अतिरिक्त वसूली गई रकम विद्यार्थियों को लौटानी होगी। साथ ही संस्थान की सीटों में कटौती जैसी दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
कैपिटेशन फीस पर पूर्ण प्रतिबंध
कानून में स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि किसी भी छात्र से प्रवेश या पाठ्यक्रम में बने रहने के लिए कैपिटेशन फीस नहीं ली जाएगी। ऐसा करने पर संस्थान और उसके प्रबंधन के जिम्मेदार व्यक्तियों पर कार्रवाई होगी।
सरकार अधिसूचित करेगी पाठ्यक्रम
राज्य सरकार उन व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को अधिसूचित करेगी, जो इस समिति के दायरे में आएंगे। इस फैसले से राज्य के हजारों छात्रों और अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
सरकार का दावा है कि इस नए कानून से निजी संस्थानों की मनमानी पर लगाम लगेगी और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी।