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राष्ट्रीय एकीकरण संस्कृति संरक्षण संवर्धन विकास में जनमानस में समानता और संतुलन के साथ साथ मूलभूत सुविधाएं संवैधानिक अधिकार.. कृष्ण कुमार पाठक

राष्ट्र के विकास में जनमानस में संवैधानिक अधिकारों की संरक्षण संवर्धन और विकास की और विधायिका द्वारा जनहित में लिए गए निर्णय को आत्महत्या करने का मूल सिद्धांत सामाजिक समन्वय के बिना हम लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुचिता अनुशासन एवं प्रशासनिक गतिविधियों में जनमानस में आस्था और विश्वास के साथ संवैधानिक अधिकारों को आत्मसात करते हुए उत्तरदायित्व निर्वहन में समस्याओं का समाधान कर पाना मुश्किल होगा ।
उपरोक्त विचारों का संक्षिप्त रूप से हम कह सकते हैं कि राष्ट्र के विकास में संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण अनुसंधान एवं विकास के लिए जनमानस के प्रतिभा अवसर की समानता के लिए मापन के सिद्धांत शैक्षिक गतिविधियों में योग्यता को सर्वोपरि रखते हुए उनके प्रतिभाओं को राष्ट्रीय विकास में नीतिगत विधायिका द्वारा उत्तरदायित्व निर्वहन में नीतिगत निर्णय ही राष्ट्रीय विकास के लिए महत्वपूर्ण योगदान होगा ।
परिवर्तन शाश्वत सत्य है इस सिद्धांत को हमें समय-समय पर जनसंख्या की दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार सृजन कृषि क्षेत्र में संभावनाओं एवं रोजगार के अवसर को दृष्टिगत रखते हुए संवैधानिक एवं वैधानिक गतिविधियों में लोक कल्याण के संरक्षण में महत्वपूर्ण स्थान होता है इसलिए विधायिका द्वारा ऐसे नीतिगत निर्णय लेना चाहिए जिसमें जनता के लिए जनता के द्वारा जनता के शासन लोकतंत्र का मूल स्वरूप को आगे बढ़ते हुए विकसित भारत की संकल्पना को हम सबको मिलकर अपने प्रतिभा और योग्यता के अनुसार राष्ट्रीय विकास में योगदान देना ही लोकतंत्र का मूल आधार है इस आधार पर चलते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था का सुदृढ़ सुचारू संचालन में संवैधानिक अधिकारों को स्वरूप जनमानस में जागरूकता लाते हुए विधायिका द्वारा नीतिगत निर्णय लेकर राष्ट्र विकास में कार्यपालिका द्वारा क्रियान्वयन ही विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने का मूल सिद्धांत है कहना अन्यथा ना होगा ।
असमानता को हम सामान्य तौर पर समानता लाने के लिए शिक्षा, अवसर, रोजगार सृजन, कृषि में उन्नत विकास एवं सुचिता पूर्ण कृषि कार्यशालाओं का आयोजन करते हुए प्रत्येक ग्राम पंचायत को लघु कुटीर उद्योग एवं मानव जीवन में प्राकृतिक सामान्य में बाग बगीचे खेत खलियान पोखरी तालाब में अत्यधिक वैज्ञानिक कृषि अनुसंधान के द्वारा सिंघाड़ा कमलगट्टा मोती के उत्पाद को भी बढ़ावा दिया जा सकता है साथ ही साथ पशुपालन डेरी उद्योग को धरातल पर लाने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर नीति बनाने की जरूर होनी चाहिए जब हम छोटी इकाइयों में आत्मनिर्भर की ओर आगे बढ़ेंगे तो निश्चित तौर पर हम विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में काफी मददगार सिद्धांत का लाभ आमजन के साथ राष्ट्र विकास की ओर उत्तम पहल होगा ।
कृष्ण कुमार पाठक
मातृभाषा रत्न मानद उपाधि
लेखक/पत्रकार

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