अभ्यास की आदत विकसित करना जरूरी, केवल ज्ञान संचय पर्याप्त नहीं: प्राचार्य
वैशाली/ पटेढ़ी बेलसर/राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद्, पटना, बिहार के तत्वावधान में प्राथमिक शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय, सोरहत्था, पटेढी बेलसर में कक्षा 9 एवं 10 के हिंदी शिक्षकों के लिए पांच दिवसीय सेवाकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम 23 फरवरी 2026 से आयोजित किया गया है, जो 27 फरवरी 2026 तक चलेगा। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य हिंदी शिक्षण को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक एवं छात्र-केन्द्रित बनाना है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुरेश कुमार ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि केवल ज्ञान का संचय करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में अभ्यास की आदत विकसित करना अधिक आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह अधिक महत्वपूर्ण है कि हम हिंदी क्या पढ़ाते हैं, इसके बजाय विद्यार्थी हिंदी के माध्यम से क्या और कैसे सोचते हैं। उन्होंने भाषा के शैक्षिक दर्शन, पाठ्यपुस्तक की संरचना, सीखने की डिजाइन, साहित्यिक विधाओं की अनुभूति तथा मूल्यांकन की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
प्राचार्य ने कहा कि हिंदी की कक्षा में विद्यार्थियों को केवल पाठ याद करने तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें पाठ पर प्रश्न उठाने, विभिन्न दृष्टिकोणों की तुलना करने, तर्क प्रस्तुत करने और अपने निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने डिजिटल माध्यमों और नवाचार आधारित कक्षा प्रक्रियाओं को अपनाने पर भी बल दिया, जिससे शिक्षण प्रक्रिया अधिक रोचक और प्रभावी बन सके।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रशिक्षण प्रभारी व्याख्याता डॉ. मुकेश कुमार, व्याख्याता श्रीमती जया, डॉ. शेमुषी, डॉ. सहजादा सलीम शम्स तथा साधनसेवी उमेश कुमार प्रसाद सिंह, नवनीत कुमार एवं कुमारी विशाखा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साधनसेवी उमेश कुमार प्रसाद सिंह ने साहित्यिक विधाओं की अनुभूति, भाषा और सौंदर्य के साथ-साथ कौशल एकीकरण आधारित पाठ योजना के निर्माण पर विस्तृत जानकारी प्रदान की।
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, नवाचार आधारित गतिविधियों और प्रभावी मूल्यांकन प्रणाली के बारे में भी जानकारी दी गई। कार्यक्रम के अंतिम दिन 27 फरवरी 2026 को प्रशिक्षण का समापन होगा, जिसमें प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे।