बागमती बांध परियोजना: 11 दिनों से जारी आमरण अनशन समाप्त, सरकार करेगी समीक्षा
मुजफ्फरपुर: पिछले 11 दिनों से बागमती बांध निर्माण के विरोध में चल रहा गतिरोध आखिरकार प्रशासनिक आश्वासन के बाद समाप्त हो गया है। 'चास वास जीवन बचाओ बागमती संघर्ष मोर्चा' के बैनर तले अनशन पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने एसडीओ (पूर्वी) के इस भरोसे पर अपना आंदोलन स्थगित किया कि जब तक सरकार की नई समीक्षा रिपोर्ट नहीं आती, बांध का निर्माण कार्य बंद रहेगा।
आंदोलन को निर्णायक मोड़ तब मिला जब इस मुद्दे की गूंज बिहार विधानसभा में सुनाई दी।
विधायक कोमल सिंह ने सदन में बागमती बांध निर्माण को लेकर एक उच्चस्तरीय 'रिव्यू कमेटी' बनाने की पुरजोर मांग की।
भाकपा माले नेता व काराकाट विधायक अरुण कुमार सिंह ने भी सदन के पटल पर इस मुद्दे को उठाते हुए परियोजना की प्रासंगिकता पर सवाल खड़े किए।
विधायकों की इस सक्रियता के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ और आला अधिकारियों की टीम अनशन स्थल पर पहुंची।
वार्ता के दौरान आंदोलनकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह परियोजना 1960 के दशक की सोच पर आधारित है। वर्तमान भौगोलिक और पर्यावरणीय स्थितियों में यह अवैज्ञानिक है, क्योंकि यह जल निकासी के प्राकृतिक मार्ग को बाधित करती है। अव्यावहारिक है, जिससे हजारों एकड़ उपजाऊ भूमि और बस्तियों के डूबने का खतरा है। साथ ही पर्यावरण के प्रतिकूल है।
डीसीएलआर सह एसडीएम (पूर्वी) कृष्ण कुमार, बीडीओ डॉ. संजय कुमार राय और अंचलाधिकारी शिवांगी पाठक ने मोर्चा के सदस्यों को आश्वस्त किया कि रिव्यू कमेटी को पुनर्जीवित करने के लिए जिलाधिकारी के माध्यम से राज्य सरकार को ठोस प्रस्ताव भेजा जाएगा। जब तक सरकार की ओर से नए दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं होते, तब तक निर्माण कार्य स्थगित रखा जाएगा।
इस आश्वासन के बाद 11 दिनों से अनशन बैठे रामलोचन सिंह, सीताराम राय, राजकुमार मंडल और राधा रानी को अधिकारियों और नेताओं ने जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया। इस अवसर पर संघर्ष मोर्चा के संयोजक जितेंद्र यादव, पूर्व विधायक निरंजन राय, भाकपा माले के राज्य सचिव कुणाल कुमार, ठाकुर देवेंद्र सिंह, नवल सिंह, रंजीत सिंह, सुनील राय और बैजनाथ मिश्र सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. जफर ने की तथा मंच संचालन राहुल राय द्वारा किया गया।