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एम्स गोरखपुर में नागालैंड के डॉक्टर से कथित नस्लीय दुर्व्यवहार, देशभर में आक्रोश नॉर्थ-ईस्ट के नागरिकों की सुरक्षा पर उठे सवाल, सख्त कानून की मांग तेज

All India Institute of Medical Sciences, Gorakhpur (एम्स गोरखपुर) में नागालैंड के एक डॉक्टर के साथ कथित तौर पर स्टॉकिंग और नस्लीय दुर्व्यवहार की घटना सामने आने के बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया है। यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देश की एकता और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन गया है।
बताया जा रहा है कि संबंधित डॉक्टर, जो Nagaland से हैं, को उनकी पहचान और क्षेत्रीय पृष्ठभूमि के आधार पर अपमानजनक टिप्पणियों और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर एक भारतीय दूसरे भारतीय के साथ ऐसा व्यवहार कैसे कर सकता है?
दिल्ली के मालवीय नगर में भी हुआ था ऐसा मामला
हाल ही में Malviya Nagar, दिल्ली में भी नॉर्थ-ईस्टर्न समुदाय के एक व्यक्ति के साथ नस्लीय टिप्पणी और दुर्व्यवहार का मामला सामने आया था, जिसमें पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया। इस तरह की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि समस्या अलग-अलग हिस्सों में मौजूद है और इसे जड़ से खत्म करने की आवश्यकता है।
भारत की विविधता ही हमारी ताकत है
नॉर्थ-ईस्ट के राज्य — जैसे Manipur, Assam, Meghalaya, Mizoram और अन्य — भारत का अभिन्न हिस्सा हैं। वहाँ के नागरिक उतने ही भारतीय हैं जितने देश के किसी भी अन्य राज्य के लोग।
ऐसे में क्षेत्र, भाषा, रंग-रूप या संस्कृति के आधार पर भेदभाव करना न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि भारतीय संविधान की मूल भावना के भी खिलाफ है।
सख्त कानून और जीरो टॉलरेंस पॉलिसी की मांग
देशभर में यह मांग उठ रही है कि संसद (लोकसभा) में एक विशेष और स्पष्ट एंटी-रेसिज़्म कानून पारित किया जाए, जिसमें नस्लीय टिप्पणी, स्टॉकिंग, क्षेत्रीय भेदभाव और उत्पीड़न को स्पष्ट रूप से दंडनीय अपराध घोषित किया जाए।
जीरो टॉलरेंस पॉलिसी लागू होनी चाहिए ताकि कोई भी व्यक्ति इस तरह की हरकत करने से पहले दस बार सोचे और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
एकता के लिए सामूहिक आवाज़ जरूरी
हम सबकी जिम्मेदारी है कि यदि नॉर्थ-ईस्टर्न या किसी भी राज्य, जाति या समुदाय के व्यक्ति के साथ कोई नस्लीय या भेदभावपूर्ण व्यवहार करता है, तो उसके खिलाफ आवाज उठाएं, शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराएं और सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग करें।
जब तक समाज और सरकार दोनों मिलकर गंभीर कदम नहीं उठाएंगे, तब तक ऐसी घटनाएं पूरी तरह समाप्त नहीं होंगी।
भारत एक है — और हर भारतीय का सम्मान समान है।

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