बिना FMGE क्लियर करने वालों के अवैध हॉस्पिटल्स के स्वामियों के साथ नोडल अधिकारी बिताते हैं अपना कीमती समय
संभल तहसील के अधिकारी से गंभीर सवाल: अवैध चिकित्सा अनुमति मामले में विभागीय व दंडात्मक कार्रवाई की मांग
संभल, उत्तर प्रदेश।
जनपद संभल में स्वास्थ्य प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। आरोप है कि जिला स्वास्थ्य तंत्र की निगरानी में ऐसे चिकित्सकों को अस्पताल संचालन अथवा प्रैक्टिस की अनुमति दी गई, जिनकी पात्रता और पंजीकरण स्थिति विधिक मानकों के अनुरूप नहीं है। मामले में संभल सीएमओ कार्यालय के संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर प्रश्नचिह्न खड़े हुए हैं।
कानूनी प्रावधानों के अनुसार भारत में चिकित्सा अभ्यास हेतु National Medical Commission के अधीन वैध पंजीकरण अनिवार्य है। National Medical Commission Act, 2019 स्पष्ट करता है कि बिना विधिसम्मत पंजीकरण चिकित्सा अभ्यास दंडनीय है। यदि जिला स्तर पर अनुमति या लाइसेंस जारी करते समय इन प्रावधानों की अनदेखी की गई है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई संभव है।
संभावित कार्रवाई
1. विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई:
राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा नोडल अधिकारी के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस, निलंबन, या विभागीय जांच (Departmental Inquiry) प्रारंभ की जा सकती है।
2. लाइसेंस निरस्तीकरण:
यदि अनुमति नियमविरुद्ध पाई जाती है, तो संबंधित अस्पताल/चिकित्सक का पंजीकरण तत्काल निरस्त किया जा सकता है।
3. आपराधिक उत्तरदायित्व:
यदि यह सिद्ध हो कि अनुमति जानबूझकर या मिलीभगत से दी गई, तो Indian Penal Code की धाराओं—धोखाधड़ी, कूटरचना अथवा लोकसेवक द्वारा कर्तव्य की अवहेलना—के अंतर्गत एफआईआर दर्ज हो सकती है।
भ्रष्टाचार के तत्व पाए जाने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी जांच संभव है।
4. न्यायिक हस्तक्षेप:
मामले में उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर कर अवैध अनुमति निरस्त कराने तथा स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग की जा सकती है।
5. राज्य चिकित्सा परिषद की कार्रवाई:
Uttar Pradesh Medical Council भी पंजीकरण की वैधता की समीक्षा कर सकती है।
स्थानीय सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों ने मांग की है कि मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह केवल विभागीय लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर प्रशासनिक उत्तरदायित्व का मामला बन सकता है, जिसके दूरगामी प्रभाव स्वास्थ्य तंत्र पर पड़ सकते हैं।अगले लेख में नाम सहित उल्लेख करने के साथ सभी संबंधित के बारे में माननीय स्वास्थ्य मंत्री,स्वास्थ्य सचिव व महा निदेशक को अवगत कराया जाएगा।