logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

बिहार में फरवरी में नदियों का सूखना: जलसंकट की चेतावनी...

बिहार फरवरी 2026 में गंभीर जलसंकट की ओर बढ़ रहा है, जहां नवादा, नालंदा, भभुआ और बेगूसराय जैसे जिलों की नदियां सिमटकर नालों में बदल गई हैं। सोन, गंगा और गंडक जैसी प्रमुख नदियां भी अपनी चौड़ाई खो रही हैं, जो जून जैसे हालात पैदा कर रही हैं।
प्रभावित नदियां और जिलेनवादा में खुरी, सकरी, धनार्जय, तिलैया और ढाढ़र नदियां पूरी तरह सूख चुकी हैं, जबकि नालंदा की 40 नदियां जैसे पंचाने, मुहाने और सकरी बिना पानी के हैं। भभुआ (कैमूर) की सुवरा, दुर्गावती, कर्मनाशा और गोपालगंज की गंडक, दाहा नदियां भी प्रभावित हैं, जहां गंडक की धार 75% सिकुड़ गई है। भूजल स्तर नालंदा में 44 फीट तक गिर गया है।
बूढ़ी गंडक का जल गुणवत्ता संकटबीआरए बिहार विश्वविद्यालय के शोध से पता चला है कि बूढ़ी गंडक का WQI सर्दी-गर्मी में अच्छा रहता है, लेकिन मानसून में खराब हो जाता है। अखाड़ाघाट, कांटी और मोतीपुर पर टर्बिडिटी 18.55-58.37 NTU तक पहुंच गई, जो पीने योग्य सीमा से अधिक है। यह मौसमी बदलाव और प्रदूषण का संकेत देता है।
जलवायु परिवर्तन, कम वर्षा, अतिक्रमण, अवैध खनन, गाद जमा होना और भूजल दोहन मुख्य कारण हैं। जीआईएस सर्वे में 260 नदियां गायब पाई गईं, और 2050 तक संकट गहराने की आशंका है। पहले सदानीरा नदियां अब बरसाती बन गई हैं।
बिहार सरकार 'जल जीवन हरियाली अभियान' चला रही है, जिसमें जल संरक्षण और पौधारोपण पर जोर है। बजट 2026 में कोसी-मेची जोड़ो और जलाशय परियोजनाओं को धन आवंटित किया गया। गाद सफाई, अतिक्रमण हटाओ और वर्षा जल संचयन से संकट टाला जा सकता है।

1
605 views

Comment