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कैनविज घोटाला: निवेशकों की रकम अटकी, लीडरों के “सेटलमेंट” की चर्चा तेज

खुटार/बरेली/बंडा/उत्तराखंड।
कथित कैनविज कंपनी से जुड़े निवेश घोटाले को लेकर इलाके में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। निवेशकों का आरोप है कि कंपनी के मालिक कन्हैया गुलाटी के मैदान में रहने तक प्रमुख लीडरों ने किसी तरह की ठोस कार्रवाई नहीं होने दी। जैसे ही कंपनी में फंड का प्रवाह बंद हुआ, तब खुटार, बांदा और उत्तराखंड से कुछ निवेशक कार्रवाई की मांग लेकर आगे आए।
“एक हफ्ते में भुगतान” का आश्वासन, फिर टलता रहा वादा
सूत्रों के अनुसार कंपनी के प्रमुख लीडर जितेंद्र पटेल ने कथित रूप से बैठक में आश्वासन दिया था कि एक सप्ताह के भीतर भुगतान कर दिया जाएगा और तब तक कोई भी कानूनी कार्रवाई न की जाए। निवेशकों का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है।
लेकिन निर्धारित समय पर भुगतान नहीं हुआ। इसके बाद यह कहा गया कि कंपनी का फंड “कहीं फंसा हुआ है” और जल्द वापस आकर वितरित कर दिया जाएगा। अब निवेशकों को अप्रैल के बाद भुगतान का नया आश्वासन दिया जा रहा है।
बरेली में मुकदमे, लेकिन कार्रवाई पर सवाल
मामले से जुड़े कई मुकदमे बारादरी थाना में दर्ज बताए जा रहे हैं। इसके बावजूद अब तक किसी बड़े स्तर की कार्रवाई नहीं होने से निवेशकों में नाराजगी है।
यह भी चर्चा है कि स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए जितेंद्र पटेल ने बरेली में एक भुगतान संबंधी कंपनी पर केस दर्ज कराया है, ताकि उनकी टीम के लोग उन पर सीधी कार्रवाई न करें। हालांकि, इस कदम के परिणाम क्या होंगे, यह समय बताएगा।
खुटार से 10 करोड़ का निवेश, सिंह परिवार का नाम चर्चा में
सूत्र बताते हैं कि खुटार के दो प्रमुख लीडरों ने स्थानीय एक प्रतिष्ठित सिंह परिवार से जुड़े लोगों का करोड़ों रुपये कंपनी में निवेश करवा दिया। देखते ही देखते खुटार क्षेत्र से लगभग 10 करोड़ रुपये का निवेश होने की बात सामने आ रही है।
आरोप है कि इस भारी निवेश से प्रमुख लीडरों की मासिक आय 3 लाख से बढ़कर 10 लाख रुपये तक पहुंच गई। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
“सरकार से सेटलमेंट” की चर्चा
कुछ निवेशकों का आरोप है कि कथित तौर पर कुछ प्रभावशाली लोगों ने यह दावा किया कि उनका “सरकार से सेटलमेंट” हो चुका है और कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। यह भी कहा जा रहा है कि ज्यादा दबाव बनाने वालों को “सेट” कर दिया जाएगा।
इन आरोपों की पुष्टि के लिए आधिकारिक स्तर पर कोई बयान सामने नहीं आया है।
मालिक का ठिकाना अज्ञात
कंपनी के मालिक कन्हैया गुलाटी के बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं है। वे भूमिगत हैं, लापता हैं या विदेश चले गए हैं—इस पर कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह भी चर्चा है कि सुप्रीम कोर्ट के किसी वरिष्ठ वकील के माध्यम से कंपनी की कानूनी प्रक्रिया देखी जा रही है, हालांकि इसकी भी पुष्टि नहीं हो सकी है।
नई कंपनियों के जरिए फिर से निवेश?
निवेशकों का आरोप है कि कुछ लीडरों ने नई कंपनियां खोलकर फिर से लोगों को जोड़ना शुरू कर दिया है। कहा जा रहा है कि इन कंपनियों का संचालन किसी अन्य नाम से किया जा रहा है, ताकि कागजी तौर पर पुराने लीडर सीधे तौर पर फंस न सकें।
हालांकि इन दावों की भी स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
निवेशक परेशान, लीडरों की मौज?
मौजूदा हालात में निवेशक अपनी रकम को लेकर परेशान हैं, जबकि कंपनी से जुड़े प्रमुख लोग सार्वजनिक रूप से स्पष्ट जानकारी देने से बच रहे हैं।
सरकारी एजेंसियों की ओर से अब तक किसी बड़ी ठोस कार्रवाई की सूचना नहीं मिलने से निवेशकों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इस पूरे मामले में निर्णायक कदम कब उठाया जाएगा।
(नोट: उपरोक्त खबर निवेशकों और स्थानीय सूत्रों के दावों पर आधारित है। मामले की निष्पक्ष जांच और आधिकारिक पुष्टि होना अभी शेष है।)

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