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"एक और कदम" – संघर्ष से सम्मान तक की प्रेरक गाथा सत्यम सिंह बघेल प्रकाशक – नर्मदा प्रकाशन, भोपाल

दिव्यांग कल्याण और विकास परिषद के राष्ट्रीय कार्यकर्ता, अध्यक्ष, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं साहित्यकार चतरसिंह गेहलोत विगत लगभग 30 वर्षों से दिव्यांगजनों के अधिकार, सम्मान और स्वाभिमान के लिए निरंतर कार्यरत हैं। उनका जीवन संघर्ष, सेवा और संवेदनशील साहित्य साधना का अद्भुत संगम है।

चतरसिंह गेहलोत ने दिव्यांगजनों की पीड़ा को केवल देखा ही नहीं, बल्कि उसे आत्मसात किया है। उन्होंने समाज में दिव्यांग व्यक्तियों की वास्तविक स्थिति, उनकी चुनौतियों और उनके अदम्य साहस को अपने लेखन के माध्यम से सशक्त स्वर दिया है।

अब वे दिव्यांग अधिकारों और संवैधानिक चेतना को केंद्र में रखकर अपना पहला उपन्यास लेकर आ रहे हैं —

“एक और कदम”

यह उपन्यास एक ऐसे दिव्यांग व्यक्ति की प्रेरक यात्रा को दर्शाता है, जो समाज की उपेक्षा और बाधाओं के बीच भी हार नहीं मानता। वह अपनी परिस्थितियों को बदलते हुए स्वयं को स्थापित करता है और यह सिद्ध करता है कि दिव्यांगता कमजोरी नहीं, बल्कि एक विशेष सामर्थ्य है।

“एक और कदम” केवल एक कहानी नहीं है, बल्कि यह आत्मविश्वास, संघर्ष और सामाजिक परिवर्तन की गाथा है। यह उपन्यास पाठकों को यह सोचने पर विवश करेगा कि समाज में दृष्टिकोण बदलना कितना आवश्यक है। जब अवसर, शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों की समझ मिलती है, तब असंभव भी संभव बन जाता है।

हमें अत्यंत हर्ष है कि यह प्रेरक और सामाजिक चेतना से ओतप्रोत उपन्यास शीघ्र ही नर्मदा प्रकाशन, भोपाल द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।

हमें पूर्ण विश्वास है कि चतरसिंह गेहलोत का यह उपन्यास साहित्य जगत में नई दिशा देगा और दिव्यांगजन अधिकारों के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करेगा।

आइए, तैयार हो जाइए उस प्रेरक कृति को पढ़ने के लिए, जो हर पाठक को जीवन में “एक और कदम” आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी।

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