राष्ट्रिय सैनिक संस्था के राष्ट्रिय अधिवेशन में देश की आंतरिक सुरक्षा का लिया संकल्प
नई दिल्ली। राजघाट क्षेत्र के गाँधी स्मृति एंड दर्शन स्थित सत्यागृहमंडप में राष्ट्रिय सैनिक संस्था के 18वें राष्ट्रिय अधिवेशन का आयोजन किया गया। उक्त समारोह के उद्घाटन के अवसर पर माननीय रक्षामंत्री श्री राज नाथ सिंह जी ने, मिजोरम के राज्यपाल माननीय जनरल वी के सिंह जी ने और बिहार के राज्यपाल माननीय आरिफ मोहम्मद खान जी ने ऑडियो वीडियो सन्देश भेजे :
भारत के माननीय रक्षामंत्री जी ने कहा की पूर्व सैनिक सेवानिवृत के बाद भी सेना के मूल्य को लेकर जीता है उसे समाज में एक मोडल समझा जाता है। समाज सेवा और राष्ट्र सेवा अलग अलग नहीं है। मैं पूर्व सैनिको का आवाहन करता हूँ की वो राष्ट्रिय एकीकरण और चरित्र निर्माण में अपेक्षा से अधिक सहयोग करें।
बिहार के राज्यपाल ने कहा की देश की आन्तरिक सुरक्षा को बनाये रखने के लिए पूर्व सैनिको का सहयोग न केवल उपयोगी होगा बल्कि अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा ।
मिजोरम के माननीय राज्यपाल जी ने कहा की सेना सरहद पर सुरक्षा देने के साथ साथ देश में आई हुई आपदाओं पर भी नियंत्रण करती है। प्रत्येक सैनिक में कर्तव्यनिष्ठा और इमानदारी होती है। पूर्व सैनिक आआंतरिक सुरक्षा को कायम रखने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं !
अधिवेशन का केंद्र बिंदु था " देश की आंतरिक सुरक्षा "
अधिवेशन के मुख्य अतिथि उत्तराखंड के राज्यपाल माननीय लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह जी ने कहा की देश की आंतरिक सुरक्षा एक गंभीर विषय है और इसे सुनिश्चित करने के लिए पूर्व सैनिको और देश भक्त नागरिको को भी आगे आना होगा। कल ही माननीय रक्षामंत्री जी ने आतंकवाद नियंत्रण पर राष्ट्रिय निति घोषित की है जिसके 7 स्तम्भ हैं। हमारे पड़ोसी देश अस्थिरता और आतंक फैलाने में लगे हुए है। हमारा देश इतना बड़ा है की हर जगह सुरक्षा कर्मी तैनात नहीं किये जा सकते । इसलिए लोगों की मदद से स्थानीय पूर्व सैनिक आतंकी गतिविधियों को परोक्ष अथवा अपरोक्ष सहयोग देने वाले को चिन्हित कर सकते है और समय रहते सुरक्षा एजेंसी को आगाह कर सकते है। उन्होंने कहा की राष्ट्रिय सैनिक संस्था के प्रत्येक सदस्य को कम से कम 108 सदस्य बनाने चाहिए | मैं सिख हूँ और इसलिए सीखते रहना मेरा दायित्व है ।
परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के संस्थापक स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने कहा की हमें SEA WALL के बजाय TREE WALL बनानी चाहिए और सभी नाकारात्मक सुझावों को हाशिये से बाहार कर देना चाहिए | हम यमुना पर भी TREE WALL लगाने का अभियान चलाने वाले है ।
विश्व शांति केंद्र के संस्थापक आचार्य लोकेश सनातनी जी ने कहा की सैनिक संस्था का संरक्षक होने के कारण मुझे वो शौर्य प्राप्त हुआ जो मैं रामलीला मैदान में प्रदर्शित कर सका। हमने अमेरिका में भी एक विश्व शांति केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया है।
पावन चिंतन धारा आश्रम के संस्थापक प्रोफेसर पवन सिन्हा गुरु जी ने कहा की हमें REALITY को बढ़ावा देना चाहिए ना की REEL की दुनिया को कौशल अनुशासन चरित्र निर्माण मे पूर्व सैनिको के योगदान को हम बढ़ावा देने का प्रयत्न कर रहे है। आन्ध्र प्रदेश सरकार के सलाहकार श्री राजन छिब्बर ने कहा की हमें NEVER GIVE UP के सिद्धांत पर चलना चाहिए। पूर्व केन्द्रीय मंत्री माननीय श्री विजय गोयल जी ने कहा की पूर्व सैनिक, राष्ट्रिय एकीकरण और चरित निर्माण के द्योतक है। लिहाजा उन्हें देश की आंतरिक सुरक्षा कायम करने में भागीदारी देनी चाहिए ।
तेलंगाना के अध्यक्ष मेजर जनरल श्रीनिवास ने कहा की पूर्व सैनिक देश की आंतरिक सुरक्षा में योगदान देने के लिए तैयार भी है और सक्षम भी है। आवश्यकता है की केंद्र और राज्य सरकारे उनके अधिकार और सांकेतिक वेतन निर्धारित करे | तमिलनाडु के मेजर जनरल इन्द्राबालान ने कहा की हम ओपरेशन सिंदूर में जीते हैं परन्तु हमारी TECHNOLOGY में और विकास की आवश्यकता है । राजस्थान से मेजर जनरल अनुज माथुर ने सिपाही की क्षमताओं और शौर्य पर प्रकाश डाला और उत्तराखंड से मेजर जनरल एम एल असवाल ने कहा की सैनिक आपदाओ पर नियंत्रण कर सकते है तो पूर्व सैनिक आतरिक सुरक्षा को भी सुनिश्चित कर सकते है।
राष्ट्रिय पुरुस्कार से सम्मानित पुणे से श्रीमती अमृता भारती ने कहा की केवल सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के भरोसे आंतरिक सुरक्षा को नहीं छोड़ा जा सकता। हम महिलाओं की भी कुछ जिम्मेदारी है। हम अलग अलग स्तर पर समितियां बनाकर काम करेंगे ।
एयर कमोडोर सुरेन्द्र सिंह, ब्रिगेडियर सुनील गाउपांडे, कमोडोर विजेल बबेले, कर्नल डिमरी, कर्नल एम के शर्मा, कर्नल नरेश कुमार, कर्नाटक से कर्नल गुरुराज एवं अन्य प्रदेशो के वरिष्ट देश भक्त नागरिको ने अपने अपने शब्दों में बताया की जैसे औरत दाई से अपना पेट नहीं छुपा सकती ऐसे ही आतंकियों के स्लीपर सेल स्थानीय लोगों की आँख से नहीं बच सकते । आवश्यकता उन्हें पहचानने की और उनकी जानकारी खुफियां स्तर पर सुरक्षा बलों को देने की है। हमारे सामने दो पाकिस्तान है। एक पाकिस्तान और एक भारत का पाकिस्तान | भारत का पाकिस्तान अधिक दुःख दाई है क्योंकि ये भारत में ही रहता है। जैसे किसी भी असंभव लगने वाले काम को सेना संभव बना देती है वैसे ही नासूर की शक्ल ले चुके आतंकवाद के नियंत्रण में पूर्व सैनिक और देश भक्त नागरिक यानी राष्ट्रिय सैनिक संस्था महत्वपूर्ण सहयोग दे सकती है।
राष्ट्रिय सैनिक संस्था के राष्ट्रिय अध्यक्ष वीर चक्र प्राप्त कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी ने सुझाव दिया की हमारी दो दर्जन से अधिक इंटेलिजेंट एजेंसीस के लिए केवल एक कमांडर नियुक्त किया जाये। आर्मी, पेरामिलिट्री फोर्स और पुलिस के संयुक्त अभियान भी एक कमांडर के आदेश पर ही काम करें ना की संयुक्त स्तर पर और स्लीपिंग सेल को संरक्षण देने वाले राजनेताओं में से किसी एक को पकड़कर तादाद से ज्यादा सजा दी जाये। 3 महीने में स्थिति बदल जायेगी ।
देश के 20 प्रदेशो से आये राष्ट्रिय सैनिक संस्था के करीब 500 पूर्व सैनिको और देश भक्त नागरिकों ने भारत की आआंतरिक सुरक्षा कायम करने में अपना सहयोग देने के लिए दो संकल्प लिए:
1. "हम संकल्प लेते हैं की समाज में एक दूसरे के प्रति शत प्रतिशत सहनशीलता का अनुसरण करेंगे परंतु जब देश की सुरक्षा का सवाल होगा तो सहनशीलता को शून्य कर दिया जाएगा ।
2. हम यह भी संकल्प लेते हैं की सोशल मीडिया पर कट्टरपंथियों द्वारा हमारे युवाओं को बरगलाने के लिए चलाए जा रहे रेडिकलाइजेशन प्रोग्राम को निष्क्रिय करने के लिए हम यथासंभव सोशल मीडिया पर देश भक्ति जागृत करने के लिए डी-रेडिकलाइजेशन अभियान चलाएंगे
अधिवेशन में शहीद सिपाहियों के परिवारों को सम्मानित किया गया और उनके लिए काम करने वाले हरीश चन्द्र बद्रीनाथ राठौड (महाराष्ट्र) डा श्रीमती अर्चना देशमुख (मुंबई) श्री मुकेश कुमार त्यागी (हापुड), श्री सजय प्रजापति (उत्तराखंड) गौरव सेनानी जान सिंह (गाजियाबाद) को प्रोत्साहन स्वरूप प्रतीक चिन्ह भेट किया गया।
राष्ट्रीय सैनिक संस्था एक 25 वर्ष पुराना पंजीकृत अराजनैतिक और ऐसा विशेष संगठन है जिसमें पूर्व सैनिक और देश भक्त नागरिक दोनो ही शामिल है। शहीद सिपाहियों के परिवारों का सम्मान देश में व्याप्त कुरीतियो के खिलाफ आवाज उठाना और स्कूलों में प्रारम्भिक सैनिक प्रशिक्षण इसके उद्देश्यों में शामिल है। राष्ट्रीय सैनिक संस्था कर सूक्ष्म परिचय सलग्न है।
महाराष्ट्र के राष्ट्रिय सैनिक सस्था की महाराष्ट्र इकाई के प्रदेश अध्यक्ष हरिश्चंद्र बदरीनाथ राठौड द्वारा प्रारम्भिक सैनिक प्रशिक्षण करे बुकलेट वर विमोचन किया गया।
प्रोफेसर नीलम पवार और श्रीमती सीमा त्यागी ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा की वन्दे मातरम्, राष्ट्र गान, शहीदों की आरती और आआंतरिक सुरक्षा में कर्तव्यनिष्ट, अनुशासित और इमानदार पूर्व सैनिको का योगदान ही वर्तमान की चिल्लाती हुई आवश्यकता है ।
इस अवसर पर महिलाओं में श्रीमती उर्वशी वालिया, लताश्री वडनेरे, सुभागी, साध्वी पवन मालवी, मधु शर्मा , चित्रलेखा, दर्शन कुलकर्णी, मोनिका गोयल, हिना शर्मा, निशा शर्मा, मंजू घी, मीना, डा ऋचा भदौरिया नीता लांडे, अनीता, साधना सिंह, उषा चोहान, मंजू हिसिन, वंदना जोशी, कीर्ति चावला, संजीवनी पवार प्रतिज्ञा मानकर, अभिलाषा दास हंस, पंचायती पवार सहित अन्य महिलाओं ने भी अधिवेशन में सक्रीय भाग लिया और पुरुषो में जनार्धन पाटिल, कप्तान राकेश कुमार, विशाल मेहता, योगेश श्रीधर, पंडित पी के तिवारी ओम प्रकाश, जितेन्द्र राठोर, मकबूल मलिक, श्याम लाल गडवाल, सत्यप्रकाश गुप्ता, रत्न केशरी, कैप्टन आर पी जोशी, सुदर्शनराव, सत्यनारायण, वेड प्रकाश ज्ञानेंद्र त्यागी, ब्रिजेश कुमार, कैप्टन के पी सिंह, पी पी सिंह, राजेन्द्र राठी, अशोक कुमार, बी पी शर्मा, अशोक वर्मा, दुष्यंत प्याशी सतीश नेगी, मांगे राम, हितेश शर्मा, सुरेश पुंडीर सहित करीब 500 पूर्व सैनिको और देश भक्त नागरिको ने सक्रीय और प्रशसनीय भाग लिया ।
उक्त कार्यक्रम का मुख्यत: पहले दिन से आखरी दिन तक बेहतरीन आयोजन राजिव जोली खोसला, गौरव सेनानी ज्ञान सिंह, चन्दन सिंह, गणेश दत्त, राजेन्द्र त्रिपाठी, उषा राणा, स्वाति बंसल, पुष्कर बिष्ट आदि ने किया।