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*संयुक्त किसान मोर्चा - SKM* 24 फरवरी, 2026, नई दिल्ली

*संयुक्त किसान मोर्चा - SKM*
प्रेस विज्ञप्ति
24 फरवरी, 2026, नई दिल्ली

*भारत–अमेरिका व्यापार समझौते एवं अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों के खिलाफ जीत तक देशव्यापी संयुक्त संघर्ष का SKM का ऐलान*

*केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और कृषि मजदूर संगठनों के मंच के साथ समन्वय में अंतिम कार्यक्रम की घोषणा की जाएगी*

*9 मार्च को जंतर-मंतर पर मजदूर* – *किसान संसद*

*10 मार्च से 13 अप्रैल (जलियांवाला बाग दिवस) तक देशभर में महापंचायतें* — *शुरुआत बरनाला (पंजाब) से*
*23 मार्च को देशव्यापी साम्राज्यवाद-विरोधी दिवस के रूप में मनाया जाएगा*

SKM की राष्ट्रीय परिषद की बैठक ने निर्णय लिया है कि जब तक प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक स्वतंत्र संघर्षों के साथ-साथ मजदूरों के साथ संयुक्त संघर्षों को तेज किया जाएगा। प्रमुख मांगों में भारत–अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करना, बिजली बिल, बीज विधेयक, चार श्रम संहिताओं, ग्राम-जी अधिनियम का विरोध तथा MSP@C2+50% की कानूनी गारंटी, कर्जमाफी और 2013 के LARR अधिनियम के क्रियान्वयन जैसी लंबित मांगें शामिल हैं।

SKM केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और कृषि मजदूर संगठनों के मंच के साथ समन्वय बैठकें करेगा और संयुक्त संघर्षों के अंतिम कार्यक्रम पर निर्णय लेगा।

SKM 9 मार्च तक गांवों में जनसभाओं के माध्यम से संघर्ष को गांव-गांव तक ले जाएगा। इसमें भारत के राष्ट्रपति से वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal को बर्खास्त करने, प्रधानमंत्री को राष्ट्रविरोधी भारत–अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करने का निर्देश देने तथा वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman को गेहूं और धान किसानों के बोनस को समाप्त करने वाले डीओ पत्र को वापस लेने का निर्देश देने की मांग की जाएगी। किसान डाकघरों तक जुलूस निकालकर राष्ट्रपति को ऐसे खुले पत्र भेजेंगे। बैठक ने सेब, सोयाबीन, कपास, मक्का आदि प्रभावित फसलों की खेती करने वाले गांवों में विशेष अभियान चलाने का भी निर्णय लिया।

27 फरवरी या उसके बाद SKM के प्रतिनिधिमंडल संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विपक्ष के नेताओं से मिलेंगे। उनसे केंद्र की मोदी सरकार द्वारा सत्ता के केंद्रीकरण का विरोध करने, राज्यों के संघीय अधिकारों की रक्षा करने, संसद से जीएसटी अधिनियम में संशोधन कर राज्यों की कराधान शक्ति बहाल करने तथा विभाज्य कर पूल (सेस और अधिभार सहित) में राज्यों की हिस्सेदारी वर्तमान 33% के बजाय 60% करने की मांग की जाएगी।

बैठक ने निर्णय लिया कि संसद के अगले सत्र के पहले दिन, 9 मार्च को जंतर-मंतर पर ट्रेड यूनियनों और कृषि मजदूर संगठनों के मंच के साथ मिलकर मजदूर–किसान संसद आयोजित की जाएगी।

बैठक ने सभी राज्य समन्वय समितियों से आह्वान किया कि वे 10 मार्च से 13 अप्रैल (जलियांवाला बाग दिवस) तक देशभर में महापंचायतें आयोजित करें। इसकी शुरुआत पंजाब के बरनाला से होगी। इन महापंचायतों में हजारों किसान भाग लेंगे, भारत–अमेरिका व्यापार समझौते और मोदी सरकार की अन्य कॉरपोरेट-समर्थक नीतियों के खतरों को समझाया जाएगा तथा भविष्य के लंबे संघर्ष की तैयारी की जाएगी।

23 मार्च शहीद दिवस को देशभर में साम्राज्यवाद-विरोधी दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इसके विस्तृत कार्यक्रम राज्य स्तर पर तय किए जाएंगे।

बैठक ने पंजाब, ओडिशा और महाराष्ट्र में किसानों के आंदोलनों पर किए गए पुलिस दमन की कड़ी निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया।

बैठक में संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) द्वारा भेजे गए पत्र पर चर्चा की गई और उनसे वार्ता के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया। इस समिति में जोगिंदर सिंह उग्राहां, युधवीर सिंह, पी. कृष्णप्रसाद, रामिंदर सिंह पटियाला और बलदेव सिंह निहालगढ़ शामिल होंगे।

MSP और संबंधित मुद्दों पर किसानों की मांगों के संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित समिति से मिलने के लिए 15 सदस्यीय समिति का गठन किया जाएगा।

बैठक की अध्यक्षता सात सदस्यीय अध्यक्षमंडल ने की, जिसमें जोगिंदर सिंह उग्राहां, राकेश टिकैत, डॉ. अशोक धवले, आशीष मित्तल, जगमोहन सिंह, राजन क्षीरसागर और जोगिंदर सिंह नैन शामिल थे। पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र और केरल सहित 9 राज्यों से 150 से अधिक प्रतिनिधियों ने बैठक में भाग लिया। इंद्रजीत सिंह ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। प्रतिभागियों ने कुरुक्षेत्र स्थित जाट धर्मशाला में चौधरी छोटू राम की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।

*जारीकर्ता* —
*मीडिया सेल | संयुक्त किसान मोर्चा*
संपर्क: 9447125209 | 9830052766
samyuktkisanmorcha@gmail.com

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