यमुना नदी में खनन का “टोकन खेल” — एक रवन्ना, कई ट्रिप; खनन विभाग की खामोशी पर सवाल!
देहरादून/विकासनगर (ढकरानी ज़ोन): उत्तराखंड की यमुना नदी में रिवर बेड मटेरियल (RBM) खनन को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। आरोप है कि ढकरानी क्षेत्र में ट्रैक्टर मालिकों को पट्टाधारक (पट्टा स्वामी) द्वारा सिर्फ एक बार वैध रवन्ना जारी किया जाता है, लेकिन उसके बाद एक ही टोकन (या टोकन बुक) के सहारे कई-कई ट्रिप चलाई जा रही हैं।
हाल ही में सामने आई एक पर्ची (टोकन नंबर 25522) ने इस पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों का दावा है कि पट्टाधारक ठेकेदारों/ट्रैक्टर वालों को करीब 400 टोकनों की एक बुक थमा देते हैं, जिसमें क्रेशर प्लांट का नाम छपा होता है। इसी टोकन बुक के आधार पर ट्रैक्टर दिनभर यमुना से RBM ढोते रहते हैं, बिना हर ट्रिप पर नया रवन्ना जारी किए। अगर यह सही साबित होता है, तो यह स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है — क्योंकि उत्तराखंड के खनन नियमों के तहत हर ट्रिप/ढुलाई के लिए अलग-अलग वैध रवन्ना (चालान) अनिवार्य है। इससे सरकार को राजस्व का सीधा नुकसान हो रहा है, क्योंकि royalty और अन्य शुल्क सिर्फ एक रवन्ना पर ही वसूले जा रहे हैं, जबकि ढुलाई कई गुना अधिक हो रही है।
यह “टोकन खेल” यमुना के नौघाट, भीमावाला से लेकर ढकरानी तक के इलाके में खुलेआम चल रहा है। स्थानीय सूत्र बताते हैं कि कुछ क्रेशर प्लांट्स को ही रोजाना सीमित संख्या में अनुमति दी जाती है, लेकिन टोकन सिस्टम के जरिए इससे कहीं ज्यादा मात्रा में मटेरियल निकाला जा रहा है। इससे नदी की पर्यावरणीय संरचना बिगड़ रही है, भूजल स्तर प्रभावित हो रहा है और पुलों/बुनियादी ढांचे को खतरा बढ़ रहा है।
खनन विभाग और जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। विभाग की इस खामोशी पर सवाल उठ रहे हैं — क्या माफिया का संरक्षण मिल रहा है? क्या जांच शुरू होगी?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अपील है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। अवैध/अनियमित खनन पर पहले से सख्ती के दावे किए जा रहे हैं (जैसे हाल ही में केंद्र से मिले 200 करोड़ के इंसेंटिव के बावजूद), लेकिन जमीनी हकीकत अलग दिख रही है। पछवादून क्षेत्र (ढकरानी, हरिपुर, सरना आदि) में माफिया बेखौफ है।
क्या अब कार्रवाई होगी, या “टोकन खेल” जारी रहेगा? यह सवाल उत्तराखंड की यमुना और पर्यावरण प्रेमियों के मन में है। विभाग को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए, अन्यथा जनता का विश्वास खत्म हो जाएगा।
(स्रोत: स्थानीय सूत्र, हालिया खुलासे और उत्तराखंड में चल रहे खनन से जुड़े रिपोर्ट्स पर आधारित।)