logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

काशी के डोम राजा परिवार ने डीएम से की मसाने की होली पर प्रतिबंध लगाने की मांग, मणिकर्णिका घाट पर आयोजन रोकने की मांग




वाराणसी। वाराणसी में मणिकर्णिका घाट पर आयोजित होने वाली तथाकथित “मसाने की होली” को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। काशी विद्वत परिषद के बाद अब डोम राजा परिवार के सदस्यों ने भी इस आयोजन पर आपत्ति जताई है। परिवार ने जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर कार्यालय में शिकायत देकर श्मशान घाट पर चिताओं की भस्म से होली खेलने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

डोम राजा परिवार का कहना है कि किसी भी पुराण या प्रामाणिक धार्मिक ग्रंथ में “मसाने की होली” की परंपरा का उल्लेख नहीं मिलता। उनका आरोप है कि पौराणिक मान्यताओं के नाम पर कुछ लोग महाश्मशान में हुड़दंग और अराजकता फैलाते हैं, जिससे घाट की गरिमा प्रभावित होती है।


परिवार ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस आयोजन पर रोक नहीं लगाई, तो वे इसका विरोध करेंगे।

प्रशासन से की गई औपचारिक शिकायत
डोम राजा परिवार के सदस्य विश्वनाथ चौधरी ने बताया कि इस संबंध में डीएम और पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि मणिकर्णिका घाट आस्था और अंतिम संस्कार का स्थान है, यहां इस तरह के आयोजन से मृतकों के परिजनों की भावनाएं आहत होती हैं।



आरटीआई से हुआ खुलासा: झांकी की अनुमति, लेकिन…
समाजसेवी अतुल कुल ने दावा किया कि आरटीआई के माध्यम से मिली जानकारी के अनुसार प्रशासन झांकी निकालने की अनुमति देता है। लेकिन झांकी के बाद कुछ लोग शवदाह स्थल तक पहुंचकर हुड़दंग करते हैं और भस्म से होली खेलते हैं।

उन्होंने कहा कि इस पर स्पष्ट नियम बनने चाहिए और श्मशान क्षेत्र की मर्यादा बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।

महाश्मशान की गरिमा का मुद्दा
मणिकर्णिका घाट को महाश्मशान कहा जाता है और यहां 24 घंटे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया चलती रहती है। ऐसे में भस्म की होली के आयोजन को लेकर सामाजिक और धार्मिक बहस तेज हो गई है। अब सबकी नजर प्रशासन के फैसले पर है कि वह इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या कदम उठाता है।

23
1494 views

Comment