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हरियाणा में ₹590 करोड़ का बैंक घोटाला: सरकार जवाब दे – महेंद्र सिंह

चंडीगढ़/पंचकूला।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की पंचकूला शाखा में हरियाणा सरकार के 18 विभागों से जुड़े खातों में करीब ₹590 करोड़ के कथित घोटाले का मामला सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। प्रारंभिक जांच में बैंक के चार कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है, जबकि विजिलेंस और पुलिस जांच में जुटी हुई है।
इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए महेंद्र सिंह, प्रदेश महासचिव, केकेसी हरियाणा कांग्रेस कमेटी ने कहा कि यह सिर्फ बैंकिंग लापरवाही नहीं बल्कि “सरकारी निगरानी तंत्र की बड़ी विफलता” है।
“जनता के पैसे से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं” – महेंद्र सिंह
महेंद्र सिंह ने बयान जारी करते हुए कहा,
“हरियाणा के 18 विभागों के खातों में ₹590 करोड़ का अंतर मिलना बेहद गंभीर मामला है। यह पैसा जनता की मेहनत की कमाई है। सरकार तुरंत स्पष्ट करे कि इतने बड़े स्तर पर गड़बड़ी कैसे हुई? जिम्मेदार अधिकारियों और दोषी बैंक कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”
उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की न्यायिक जांच कराई जाए और दोषियों की संपत्ति जब्त कर रिकवरी की जाए।
कालका नगर परिषद के 18 करोड़ भी सवालों में
जांच के दौरान कालका नगर परिषद के खाते से भी लगभग ₹18 करोड़ रुपये गायब होने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि करीब ₹30 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे, जिनमें से बड़ी राशि का स्पष्ट हिसाब नहीं मिल पाया।
फर्जी एफडी और निवेश का आरोप
सूत्रों के अनुसार, कुछ विभागों में फर्जी एफडी स्लिप जारी कर राशि दिखाने और असल पैसे को अन्य निवेश माध्यमों में लगाने की आशंका जताई जा रही है। मैच्योरिटी के समय रकम और ब्याज में अंतर आने पर मामला उजागर हुआ।
सरकार ने दिए निर्देश
वित्त विभाग ने सभी प्रशासनिक सचिवों को राष्ट्रीयकृत बैंकों में ही खाते संचालित करने के निर्देश दिए हैं और 31 मार्च तक सभी खातों का मिलान कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
अंत में महेंद्र सिंह ने कहा,
“यदि सरकार इस मामले में पारदर्शिता नहीं दिखाती तो केकेसी प्रदेशभर में आंदोलन करने पर मजबूर होगी। जनता को हर हाल में सच जानने का अधिकार है।”

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