श्योपुर कलेक्टर श्री अर्पित वर्मा की मानवीय कार्यशैली से श्योपुर में नई प्रशासनिक ऊर्जा, विकास की दौड़ में जिला
👉🏻जन-केन्द्रित निर्णयों और सतत निरीक्षणों से प्रशासन में कसावट;
👉🏻तबादले की चर्चाओं के बीच परिणामों पर टिकी निगाहें।
✍🏻श्योपुर जिले के कलेक्टर श्री अर्पित वर्मा की कार्यशैली इन दिनों प्रशासनिक सक्रियता और मानवीय संवेदनशीलता के संतुलित मॉडल के रूप में चर्चा में है। जन समस्याओं के त्वरित निराकरण, योजनाओं की मैदानी मॉनिटरिंग और विभागीय जवाबदेही तय करने की सख्ती ने जिले में प्रशासनिक अनुशासन को नई दिशा दी है।जैसे अवैध कॉलोनियों पर बुलडोजर चलाकर दिखा दी,स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास सहित विभिन्न विभागों की नियमित समीक्षा बैठकों में निर्देश और समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर दिया जा रहा है। अपूर्ण कार्यों पर जवाबदेही तय करने, प्रगति की निरंतर निगरानी और फील्ड विजिट के माध्यम से व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास दिखाई दे रहा है। स्थानीय स्तर पर यह धारणा मजबूत हुई है कि यदि यही गति बनी रही तो श्योपुर विकास सूचकांकों में प्रदेश स्तर पर उल्लेखनीय स्थान अर्जित कर सकता है।
इसी बीच प्रशासनिक हलकों में संभावित तबादले को लेकर चर्चाएं भी तेज हो रही। हालांकि स्थानांतरण सेवा का नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा होता है, फिर भी जनसामान्य की अपेक्षा है कि वर्तमान कार्यों की निरंतरता बनी रहे ताकि चल रहे कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण हो सकें।
फिलहाल जिले की प्रगति, योजनाओं की जमीनी हकीकत और परिणामोन्मुख प्रशासन ही आने वाले समय की दिशा तय करेंगे—चाहे मार्च तक तबादला हो या वर्तमान नेतृत्व के साथ विकास की रफ्तार और तेज हो।