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कैमूर से गाँव से निकली सुरुली आवाज अपनी आवाज से लोगों का मोह रहे दिल धनंजय सिंह

कैमूर के एक साधारण से मोहल्ले में रहने वाला 22 साल का लड़का धनंजय सिंह बचपन से ही गाने का शौकीन था। उसके पिता एक छोटी सी दुकान चलाते थे और घर की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। लेकिन धनंजय के सपने बहुत बड़े थे — वह एक दिन बड़ा सिंगर बनना चाहता था।

बचपन में जब भी टीवी पर Indian Idol आता, तो वह ध्यान से हर परफॉर्मेंस देखता और सोचता, “एक दिन मैं भी इस मंच पर गाऊंगा।” उसके आदर्श थे Arijit Singh। वह उनके गाने सुन-सुनकर रियाज़ करता और उनकी तरह दिल से गाने की कोशिश करता।

🎶 संघर्ष की शुरुआत

घर की जिम्मेदारियों के कारण धनंजय को पढ़ाई के साथ-साथ पार्ट-टाइम काम भी करना पड़ता था। दिन में वह एक कैफे में काम करता और रात में छत पर बैठकर घंटों रियाज़ करता। कई बार पड़ोसी शिकायत करते —
“इतना शोर क्यों करता है?”
लेकिन उसने हार नहीं मानी।

उसने अपने दोस्त के फोन से गाने रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर डालना शुरू किया। शुरुआत में सिर्फ 20–30 व्यूज़ आते थे। लोग मज़ाक भी उड़ाते थे। मगर धनंजय रोज खुद से कहता —
“मेहनत का फल देर से सही, लेकिन मीठा जरूर होता है।”

🌟 पहला मौका

एक दिन शहर में एक लोकल म्यूजिक कॉम्पिटिशन हुआ। धनंजय ने हिम्मत करके भाग लिया। स्टेज पर जाते समय उसके हाथ कांप रहे थे, लेकिन जैसे ही म्यूजिक शुरू हुआ, उसने आँखें बंद कीं और पूरे दिल से गाया।

परफॉर्मेंस खत्म होते ही पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। जजों ने उसकी तारीफ की और वह प्रतियोगिता जीत गया।

उसी कार्यक्रम में मौजूद एक म्यूजिक प्रोड्यूसर ने उसे स्टूडियो में गाने का मौका दिया। धनंजय का पहला गाना ऑनलाइन रिलीज हुआ — और धीरे-धीरे लोगों को उसकी आवाज़ पसंद आने लगी।

💫 सपनों की उड़ान

कुछ सालों की लगातार मेहनत के बाद धनंजय को बड़े मंच पर गाने का अवसर मिला। जिस शो को वह बचपन से देखता था — वही मंच अब उसके सामने था।

उसने स्टेज पर खड़े होकर कहा:
“सपने देखने से मत डरिए। डरिए तो सिर्फ मेहनत न करने से।”

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