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स्मृतियों और सच्चाई का पर्यटन

युद्ध, नरसंहार, प्राकृतिक आपदाओं, औद्योगिक दुर्घटनाओं, उजड़े हुए शहरों, जेलों और स्मारकों से जुड़े स्थलों की यात्राएँ की जाती हैं। इनमें से कई स्थान पहले से ही पर्यटन मानचित्र पर मौजूद थे, लेकिन अब इन्हें सामूहिक रूप से “डार्क टूरिज़्म” कहे जाने या ऐसे स्थलों को शामिल कर पूरी यात्राएँ आयोजित करने का एक नया चलन लोकप्रिय हो रहा है। सोशल मीडिया, यात्रा ब्लॉग और पॉडकास्ट जैसे माध्यमों के ज़रिये पर्यटन से जुड़े नए रुझान विकसित हो रहे हैं और व्यापक रूप से स्वीकार किए जा रहे हैं। इन स्थानों के ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को नए सिरे से प्रस्तुत कर उन्हें डार्क टूरिज़्म का हिस्सा बनाया जा रहा है। पोलैंड का ऑशविट्ज़-बिर्केनाऊ—नाज़ी अत्याचारों की क्रूर यादें ताज़ा करने वाले होलोकॉस्ट शिविर—जापान का हिरोशिमा पीस मेमोरियल पार्क, अमेरिका का 9/11 स्मारक, पर्ल हार्बर, अल्काट्राज़ जैसी पुरानी जेलें, युद्धभूमियाँ, नरसंहार स्मारक और इटली का पोम्पेई जैसे ज्वालामुखी विस्फोट के बाद संरक्षित उजड़े हुए शहर आज डार्क टूरिज़्म स्थलों के रूप में पहचाने जाते हैं।
भारत में अमृतसर का जलियांवाला बाग, पोर्ट ब्लेयर की सेल्युलर जेल, भोपाल गैस त्रासदी से प्रभावित क्षेत्र तथा दुखद घटनाओं से जुड़े ऐतिहासिक किले और तथाकथित “हॉन्टेड” स्थान डार्क टूरिज़्म की श्रेणी में आते हैं।
सस्ता हुआ हवाई यात्रा साधन, बेहतर कनेक्टिविटी, पर्यटन क्षेत्र का विकास और इंटरनेट के कारण सुविधाओं की सहज उपलब्धता ने डार्क टूरिज़्म को और अधिक लोकप्रिय बनाया है।

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