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नर्मदापुरम में काले हिरणों का क़त्ल, जंगल महकमे में भूचाल

प्राकृतिक मौत का खेल रचकर सबूत मिटाने की कोशिश, रेंजर–डिप्टी रेंजर समेत चार वनरक्षक सस्पेंड
नर्मदापुरम जिले के सिवनी मालवा क्षेत्र से ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दो बेजुबान काले हिरणों का शिकार कर उसे “प्राकृतिक मौत” बताने की कोशिश ने जंगल महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, मामला सामने आते ही जांच में लापरवाही और संदिग्ध भूमिका उजागर हुई। आरोप है कि घटना को दबाने और सबूत मिटाने का प्रयास किया गया। लेकिन मामला तूल पकड़ते ही उच्च अधिकारियों ने सख्त रुख अपनाया और सोमवार देर रात रेंजर, डिप्टी रेंजर समेत चार वनरक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि जिन काले हिरणों की मौत को सामान्य बताने की कोशिश की जा रही थी, उनकी परिस्थितियां साफ तौर पर शिकार की ओर इशारा कर रही थीं। वन विभाग की ही टीम पर सवाल उठना प्रशासन के लिए भी असहज स्थिति बन गया।
यह घटना सिर्फ दो वन्यजीवों की मौत नहीं, बल्कि संरक्षण व्यवस्था पर करारा तमाचा मानी जा रही है। जिन कंधों पर जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, वही संदेह के घेरे में आ गए।
जिले में इस कार्रवाई के बाद विभाग में अफरा-तफरी का माहौल है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या निलंबन के बाद वास्तविक दोषियों तक जांच पहुंचेगी या फिर मामला फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।
फिलहाल इतना तय है कि काले हिरणों की मौत ने वन महकमे की कार्यशैली पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं और जंगल की खामोशी अब सिस्टम की जवाबदेही मांग रही है।

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