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भारत की आत्मा एक है, उसकी धड़कन में बसता है एकता का संदेश।

भारत की आत्मा एक है, उसकी धड़कन में बसता है एकता का संदेश।
हमारा देश, जिसे प्राचीन ग्रंथों में भारतवर्ष कहा गया, सिंधु नदी के किनारे बसा यह पवित्र भूमंडल सदियों से हिंदुस्तान के नाम से जाना जाता रहा। हिंदुस्तान का अर्थ है सिंधु (सिंधु नदी) के पार की भूमि—जहाँ रहने वाले सभी लोग, चाहे वे किसी भी विश्वास के हों, इस मिट्टी के पुत्र हैं। नाम में ही हिंदू है, क्योंकि यह शब्द नदी से निकला, धर्म से नहीं। फिर भी आज कुछ आवाजें उठती हैं कि "हिंदू खतरे में है" और "भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना होगा"। यह दोहराव क्यों? जब देश का नाम ही सदियों से हमारी साझा पहचान चीख-चीख कर बता रहा है कि हम सब एक हैं—तो अराजकता फैलाने, डर बेचने और विभाजन की बातें क्यों?
सच्चा देशभक्त वही है जो इतिहास को पढ़ता है, सोशल मीडिया की अफवाहों को नहीं। व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की डिग्री से नहीं, बल्कि संविधान की भावना से, गांधी-नेहरू-अंबेडकर की विरासत से प्रेरित होकर सोचता है। छोटी सोच वाले लोग ही विभाजन की भाषा बोलते हैं—चाहे वह हिंदू राष्ट्र की मांग हो या खालिस्तान की। जब सिख भाई खालिस्तान की बात करते हैं, तो वही लोग चिल्लाते हैं, मिर्ची लगती है। क्यों? क्योंकि डर लगता है कि कहीं कोई और समुदाय हावी न हो जाए। लेकिन सवाल यह है—क्या एकता का मतलब सिर्फ बहुमत की जीत है? क्या सच्चा हिंदुस्तान वही है जहाँ सिर्फ एक विचार हावी हो?
नहीं। असली हिंदुस्तान वह है जहाँ सिख, हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, जैन, बौद्ध—सब मिलकर एक राष्ट्र की नींव रखते हैं। जहाँ गुरु नानक देव जी का संदेश गूंजता है—"ना कोई हिंदू, ना मुसलमान"—और जहाँ राम की मर्यादा भी सबको साथ लेकर चलने की सीख देती है। हमारी ताकत हमारी विविधता में है, न कि किसी एक रंग में रंगने की जिद में।
जो लोग अंधभक्ति में पड़कर देश को तोड़ने वाली बातें करते हैं—चाहे वे नकली बाबा हों, राजनेता हों या सोशल मीडिया के योद्धा—वे असल में देश की आत्मा को कमजोर करते हैं। सच्ची देशभक्ति तो वह है जो कहे: "हम सब भारत के हैं, हिंदुस्तान के हैं—और यही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।"
आइए, हम छोटी सोच को छोड़ें। इतिहास से सीखें, एक-दूसरे का सम्मान करें, और इस धरती को सचमुच सर्वधर्म समभाव का मॉडल बनाएं। क्योंकि जब तक हम एक-दूसरे से डरते रहेंगे, तब तक असली खतरा बाहर नहीं, हमारे मन के भीतर रहेगा।
एक भारत, श्रेष्ठ भारत—सबका साथ हो, सबका विकास हो, सबका विश्वास हो।
डॉ एम एस बाली

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