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IDFC First Bank में 590 करोड़ का फर्जीवाड़ा, क्या सुरक्षित है आपका पैसा? जानिए क्या है नियम

प्राइवेट सेक्टर के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ ब्रांच में 590 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा सामने आया है। इससे आज बैंक के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। बीएसई पर बैंक का शेयर 16.18% गिरावट के साथ 70.04 रुपये पर बंद हुआ।

इससे निवेशकों को भारी चपत लगी है। जब किसी बैंक में इस तरह का फर्जीवाड़ा सामने आता है तो उसके ग्राहक अपने डिपॉजिट्स को लेकर चिंतित हो जाते हैं। आइए समझते हैं कि इस मामले में आरबीआई का क्या रुख है और बैंक डिपॉजिट को लेकर ग्राहकों के क्या अधिकार हैं।

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने बीएसई को एक फाइलिंग में बताया कि एक शुरुआती आंतरिक जांच में चंडीगढ़ की एक ब्रांच में फर्जीवाड़े की बात सामने आई है। हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना अकाउंट क्लोज करने और फंड को दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने की रिक्वेस्ट की थी। इसी प्रक्रिया में यह फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। इसके बाद हरियाणा सरकार के कई और विभागों के खातों में भी इस तरह की गड़बड़ी सामने आई। बैंक का कहना है कि उसने इस मामले में जांच शुरू कर दी है और फंड की पूरी राशि वसूली जाएगी।


कितना पैसा है सुरक्षित?

इस बीच आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि इस मामले में केंद्रीय बैंक की पूरी नजर है और इसमें कोई सिस्टमैटिक इश्यू नहीं है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने अब तक यह नहीं बताया कि उसकी ब्रांच में कस्टमर के डिपॉजिट का क्या होगा। लेकिन जनरल गाइडलाइन्स के मुताबिक सभी बैंक डिपॉजिट डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (DICGC) की इंश्योरेंस स्कीम के तहत आते हैं। हालांकि इनसे जुड़ी कुछ शर्तें भी होती हैं।

हर ग्राहक का अधिकतम 5 लाख रुपये का डिपॉजिट DICGC स्कीम के तहत कवर होता है। यानी अगर कोई बैंक डूब जाता है, बिक जाता है या उसका मर्जर हो जाता है तो ग्राहक को अधिकतम 5 लाख रुपये मिलेंगे। इसमें मूलधन और ब्याज दोनों शामिल हैं। इस स्कीम में फिक्स्ड डिपॉजिट, सेविंग्स अकाउंट्स, रिकरिंग डिपॉजिट्स और करेंट अकाउंट्स शामिल है।

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