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ब्रिज तो बना पर पैदल चलना हुआ मुहाल, चित्रकूट रेलवे ब्रिज के पास फुट ओवरब्रिज (FOB) की उठी मांग।

चित्रकूट। धर्मनगरी चित्रकूट में विकास की बड़ी-बड़ी बातें तो की जाती हैं, लेकिन धरातल पर योजनाएं राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बनती दिख रही हैं। चित्रकूट रेलवे ब्रिज के नीचे से गुजरने वाले पैदल यात्रियों और स्थानीय निवासियों के लिए बाजार पहुंचना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है।
पैदल पुल न होने से भारी असुविधा
रेलवे ब्रिज पर पैदल चलने के लिए उचित रास्ता या पुल (Footpath/FOB) न होने के कारण राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जो बाजार ब्रिज के दूसरी ओर मात्र चंद कदमों की दूरी पर है, वहां पहुंचने के लिए लोगों को लगभग 1 किलोमीटर का लंबा चक्कर काटकर आना पड़ रहा है। इसमें बुजुर्गों, महिलाओं और स्कूली बच्चों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है।
समय और श्रम की बर्बादी
स्थानीय लोगों का कहना है कि ब्रिज के निर्माण के समय पैदल चलने वालों की सुविधा को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। रोजमर्रा के सामान और बाजार के कार्यों के लिए लोगों का समय और मेहनत व्यर्थ हो रही है। इस समस्या के कारण न केवल लोगों को शारीरिक परेशानी होती है, बल्कि धूप और बारिश के मौसम में यह मुसीबत और भी बढ़ जाती है।
जनता की मांग
चित्रकूट के निवासियों और राहगीरों ने प्रशासन से मांग की है कि रेलवे ब्रिज के पास जल्द से जल्द एक पैदल ओवरब्रिज (Pedestrian Bridge) या शॉर्टकट रास्ता बनाया जाए। लोगों का कहना है कि जब तक पैदल पुल नहीं बनता, तब तक यह करोड़ों की लागत से बना ब्रिज आम जनता के लिए पूरी तरह सुविधाजनक नहीं कहा जा सकता।

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