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सरकार आम आदमी पर चारों तरफ से टैक्स का बोझ डाल रही है। आम आदमी मेहनत करता है, टैक्स देता है, लेकिन बदले में उसे क्या मिलता है? महंगाई बढ़ रही है, सुवि

सरकार आम आदमी पर चारों तरफ से टैक्स का बोझ डाल रही है। आम आदमी मेहनत करता है, टैक्स देता है, लेकिन बदले में उसे क्या मिलता है? महंगाई बढ़ रही है, सुविधाएं नहीं। सरकार को आम आदमी की जेब का ध्यान रखना होगा, टैक्स का बोझ कम करना होगा। मिडिल क्लास सबसे ज्यादा पिस रहा है, उसे राहत मिलनी चाहिए। बजट को सच में जनता का बजट बनाने की जरूरत है।💲👇👇

सरकार आज चारों तरफ से आम आदमी से टैक्स वसूल रही है।(tax)
ऐसा लगने लगा है जैसे आम आदमी कोई नागरिक नहीं, बल्कि “टैक्स भरने की मशीन” बनकर रह गया है।
एक आम आदमी पहले मेहनत करता है, दिन-रात पसीना बहाता है, तब जाकर सैलरी कमाता है।
उस सैलरी में से सबसे पहले सरकार इनकम टैक्स काट लेती है।
जो पैसा बचता है, उससे अगर वो कोई सामान खरीदता है तो उस पर GST देता है।
अगर गाड़ी खरीदता है तो खरीदते समय GST देता है, रोड टैक्स देता है, रजिस्ट्रेशन फीस देता है।
फिर उसी गाड़ी को सड़क पर चलाता है तो टोल टैक्स देता है।
पेट्रोल-डीजल भरवाता है तो उस पर भी भारी टैक्स देता है।🚘
यानि कमाई पर टैक्स…
खर्च पर टैक्स…
चलने पर टैक्स…
जीने पर टैक्स…
क्या आम आदमी को चारों तरफ से टैक्स के जाल में नहीं फँसा दिया गया है?
इसी मुद्दे को राज्यसभा में उठाते हुए माननीय Raghav Chadha ने कहा कि सरकार आम आदमी को टैक्स देने की मशीन समझने लगी है।
उन्होंने साफ कहा कि बजट इसलिए पास किया जाता है ताकि आम आदमी को राहत मिले, उसकी बचत बढ़े, उसका भविष्य सुरक्षित हो।
लेकिन हकीकत क्या है?
हर साल बजट आता है…
घोषणाएं होती हैं…
बड़ी-बड़ी बातें होती हैं…
लेकिन आम आदमी की जेब हल्की होती जा रही है।
मुद्रास्फीति (महंगाई) लगातार बढ़ रही है।
घर का किराया बढ़ रहा है।
स्कूल की फीस बढ़ रही है।
दवाई महंगी हो रही है।
सब्जियां महंगी हो रही हैं।
लेकिन क्या उसी हिसाब से आम आदमी की सैलरी बढ़ रही है?
नहीं।💲
सैलरी बढ़ना तो दूर, जो थोड़ा-बहुत आता है वो भी टैक्स और महंगाई में खत्म हो जाता है।
मिडिल क्लास सबसे ज्यादा पिस रहा है —
ना वो इतना गरीब है कि हर योजना का फायदा मिले,
ना इतना अमीर कि टैक्स की चिंता न करे।
GST 2.0 के समय कहा गया था कि महंगाई से राहत मिलेगी।
कहा गया था कि टैक्स सिस्टम सरल होगा और आम आदमी को फायदा मिलेगा।
लेकिन सच्चाई क्या है?
जो छूट दी गई, उसका पूरा फायदा आम आदमी तक पहुंचा ही नहीं।🥹
बीच में कंपनियां ही उस राहत को खा गईं।
ग्राहक को ना दाम में राहत मिली, ना जेब में।
आज सवाल ये नहीं है कि टैक्स क्यों लिया जाता है।
सवाल ये है कि टैक्स का बोझ आखिर किस पर डाला जा रहा है?
और बदले में आम आदमी को क्या मिल रहा है?
जब सड़कें टूटी हों,
सरकारी अस्पतालों में दवाइयां न हों,
स्कूलों की हालत खराब हो,
तो फिर इतना टैक्स किस लिए?
देश का आम नागरिक सिर्फ राहत चाहता है,
ईमानदारी से कमाए हुए पैसे में से थोड़ी सी बचत चाहता है,💲
अपने परिवार के लिए सुरक्षित भविष्य चाहता है।
सरकार को यह समझना होगा कि
आम आदमी कोई एटीएम मशीन नहीं है
जिससे जब चाहो पैसा निकाल लो।
अगर बजट में राहत नहीं मिलेगी,
अगर टैक्स का बोझ कम नहीं होगा,
अगर महंगाई पर नियंत्रण नहीं होगा,
तो सबसे ज्यादा टूटेगा वही वर्ग जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है — मिडिल क्लास।
अब वक्त है कि आम आदमी की आवाज़ सुनी जाए।
वक्त है कि बजट सच में “जनता का बजट” बने।
वक्त है कि टैक्स व्यवस्था आम आदमी के लिए न्यायपूर्ण और संतुलित बने।
अगर आप भी मानते हैं कि आम आदमी को राहत मिलनी चाहिए,
तो इस आवाज़ को आगे बढ़ाइए।
क्योंकि जब तक हम बोलेंगे नहीं, तब तक बदलाव नहीं होगा।🙏

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