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राष्ट्रीय काव्य संग्रह मंच की होली काव्य संगोष्ठी में मचा धमाल


मेरठ - होली के रंग कवियों के संग
दिनांक 21/2/2026 दिन शनिवार को नेहरू नगर में राष्ट्रीय काव्य संग्रह मंच की संगोष्ठी का आयोजन बड़े सुचारू रूप से सम्पन्न हुआ।
अध्यक्षता ईश्वर चंद गंभीर ने की
मुख्य अतिथि सतीश सहज रहे।
विशिष्ट अतिथि , दीवान गिरी गोस्वामी, गोपाल जानम, डॉ सुदेश यादव दिव्य कार्यक्रम का आरंभ मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख डॉ नीलम मिश्रा ईश्वर चंद गंभीर दीवान गिरी गोस्वामी डॉ सुदेश यादव दिव्य प्रदीप अग्रवाल अवनीश सिंघल , मंगल सिंह मंगल ने दीप प्रज्ज्वलित कर
वंदना प्रस्तुत की
डॉ सुदेश दिव्य यादव की
संचालन डॉ नीलम मिश्रा तरंग द्वारा किया गया।
गोपाल जानम ने कहा
तूने तो मुस्कुरा के मुझसे यही कहा था
हर शाम मिला करूंगी क्या तेरे शहर में अब शाम नहीं होती
नीलम मिश्रा तरंग ने कहा
आंसू के आने पर उल्लास लिखना है
पतझर के माथे पर मधुमास लिखना है।
कल्पना के पखेरू को उड़ने से मत रोको
लिख पाओ तो जीवन का इतिहास लिखना है।
गंभीर जी ने यूं कहा
होली खेली होली खेली जमके खेलो।
लेकिन इतना ध्यान रहे भैया भी नाराज ना हो।
भाभी का सम्मान रहे।
सतीश सहज ने कहा
तन बदन रंगीन कर लें इस निराले रंगीले फाग में
सभी गिले शिकवे जला दें होलिका की आग में ।
कमलेश तन्हा ने कहा
उनका इस दौर में किस तरह गुजारा होगा
जिनको हाला ने मेरी तरह मारा होगा।
अवनीश सिंघल ने कहा
आप आए तो बहारों का समा होता है
दूसरा फिर आप सा ना कोई वहां नहीं होता है।
मंगल सिंह मंगल ने कहा
दीप दीप से दीप जले पर
उनके जैसे नहीं जले
सुरेन्द्र खेड़ा जी ने पढ़ा
नशा चढ़ा है मस्ती का आज दीवानों की टोली में
रंगे हुये है पप्पू, बबलू सब चेहरे आज होली में
रीना खेड़ा ने कहा
सब होली खेले संग में जी
क्या रक्खा है ऐसे भंग में जी
बीना मंगल ने कुछ यूँ कहा
होली आई रे आई रे होली आई रे
प्रदीप अग्रवाल ने कहा
सुदेश यादव दिव्य ने पढ़ा
आ रहा है ऐसा जमाना बात सुन लो काम की।
कल को यह रह जाएगी संतान केवल नाम की।
रचना वानिया निया ने यूं कहा -गौरवपूर्ण रहा इस जग में नारी का इतिहास है।
फिर भी जाने क्यों होता है नारी का उपहास है।।

सीमा गुप्ता ने पढ़ा
जिसे देखा नहीं कभी उफ करते हुए
जिसे देखा नहीं कभी थकते हुए
संजीव त्यागी ने कहा हास्य पढ़ कर खूब तालियां बटोरी
डॉ आशा त्यागी नीरज शर्मा रीना खेड़ा, वीना मंगल ,साधना, गिरीश मोजूद रहे,
काव्य पाठ किया
अंत अंत में अमित सिंघल ने सबका आभार व्यक्त किया
प्रदीप अग्रवाल ने कहा
सुदेश यादव दिव्य ने पढ़ा
आ रहा है ऐसा जमाना बात सुन लो काम की।
कल को यह रह जाएगी संतान केवल नाम की।
रचना बानिया ने यूं कहा
सीमा गुप्ता ने पढ़ा
जिसे देखा नहीं कभी उफ करते हुए
जिसे देखा नहीं कभी थकते हुए
संजीव त्यागी ने कहा हास्य पढ़ कर खूब तालियां बटोरी
डॉ आशा त्यागी नीरज शर्मा रीना खेड़ा, वीना मंगल ,साधना, गिरीश मोजूद रहे,
काव्य पाठ किया
अंत में अमित सिंघल ने सबका आभार व्यक्त किया

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