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मुंगेली जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण बनी बड़ी पहेली, हितग्राही भारी परेशान


छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिला में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की जमीनी हकीकत इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। सरकार द्वारा गरीबों को पक्की छत देने के उद्देश्य से चलाई जा रही यह महत्वाकांक्षी योजना जिले में पूरी तरह से ढप होती नजर आ रही है, जिससे सैकड़ों जरूरतमंद परिवार परेशान और असहाय महसूस कर रहे हैं।
जिले के कई ग्रामों से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं कि किसी हितग्राही के खाते में योजना की सिर्फ एक किस्त पहुंची है, तो किसी के खाते में आज तक एक भी किस्त नहीं आई। जिन परिवारों ने उम्मीद के साथ कच्चे मकानों को तोड़कर निर्माण शुरू किया, वे अब अधूरे ढांचे और कर्ज के बोझ तले दब गए हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार पंचायत, जनपद और जिला कार्यालय के चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा। कभी बैंक की त्रुटि बताई जाती है, तो कभी पोर्टल अपडेट का बहाना बनाकर जिम्मेदारी टाल दी जाती है। इससे गरीब परिवारों की मुश्किलें दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि वे अधूरे मकानों में रहना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। कई जगहों पर लोगों ने प्रशासन पर भेदभाव और लापरवाही के आरोप भी लगाए हैं।
अब सवाल यह उठता है कि
जब योजना कागजों में सफल दिखाई जा रही है,
तो फिर जमीनी स्तर पर हितग्राही क्यों परेशान हैं?
जनता मांग कर रही है कि शासन-प्रशासन तत्काल जांच कर लंबित किस्तों का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करे, ताकि गरीबों का भरोसा इस जनकल्याणकारी योजना से न उठे।

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