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पटना यूनिवर्सिटी के आउटसोर्स कर्मियों का हंगामा, 5 माह से वेतन नहीं मिलने का आरोप; लेबर कोर्ट जाने की चेतावनी..

यूनिवर्सिटी में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें पिछले पांच महीने से वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
प्रदर्शन में कंप्यूटर ऑपरेटर, एमटीएस, स्वीपर, टेक्नीशियन समेत ग्रेड-3 और ग्रेड-4 के कर्मी शामिल रहे। कर्मचारियों का कहना है कि उनसे नियमित कर्मचारियों की तरह काम लिया जाता है, लेकिन समस्या बताने पर उन्हें आउटसोर्स कर्मी कहकर अनसुना कर दिया जाता है।
“सैलरी मांगने पर मिलता है झूठा आश्वासन”
परीक्षा विभाग में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर सूरज कुमार ने बताया कि आउटसोर्स कर्मियों को करीब पांच महीने से वेतन नहीं दिया गया है। एजेंसी की ओर से यह कहकर टाल दिया जाता है कि एग्रीमेंट नहीं हुआ है। कुछ कर्मियों को वेतन मिला भी तो उसमें कटौती कर दी गई।
उन्होंने कहा कि कुलपति और रजिस्ट्रार से भी मुलाकात की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हर बार “आज-कल” का आश्वासन देकर मामले को टाल दिया जाता है। कर्मियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र वेतन भुगतान नहीं हुआ तो वे लेबर कोर्ट में आवेदन देकर कानूनी कार्रवाई करेंगे।
2018 से बोनस नहीं, वेतन कटौती का आरोप
कर्मचारियों ने कुलपति को पत्र लिखकर बताया है कि 1 सितंबर 2021 से अब तक वेतन में कटौती कर भुगतान किया गया है। उनका आरोप है कि वर्ष 2018 से वेतन अंतर राशि और बोनस का भुगतान नहीं हुआ है।
कर्मियों का कहना है कि बिहार सरकार द्वारा 13 बार गजट जारी कर मानदेय बढ़ाने की बात कही गई, लेकिन विश्वविद्यालय ने केवल तीन बार ही मानदेय में वृद्धि की। साथ ही वेतन से 18 प्रतिशत जीएसटी सेवा शुल्क काटे जाने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई है। उनका दावा है कि सेवा शुल्क एजेंसी पर लागू होता है, न कि कर्मियों पर।
सितंबर 2021 से अब तक वेतन पर्ची (सैलरी स्लिप) भी नहीं मिलने की शिकायत कर्मचारियों ने की है।
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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