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पनवाड़ का नाला: 3 किमी तक टूटे स्लैब 6 माह में 8 घायल, कब जागेंगे जिम्मेदार

कस्बे के मध्य से गुजर रहे देवली-अरनिया स्टेट हाइवे पर आबादी क्षेत्र में लगभग 3 किमी तक बने भूमिगत नाले के ऊपर डाले गए स्लैब जगह-जगह से क्षतिग्रस्त होकर टूट चुके हैं।
करीब एक मीटर चौड़े और दो मीटर गहरे इस नाले के खुले हिस्से राहगीरों, वाहन चालकों और मवेशियों के लिए जानलेवा बन गए हैं। अस्पताल, नंदपुरा, स्कूल के सामने, सेंट्रल बैंक के सामने और श्रीराम नगर बस्ती जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में आए दिन लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। हाइवे के दोनों ओर करीब 3 किमी तक कई स्थानों पर स्लैब टूटने से गहरे गड्ढे बन गए हैं। रात के समय पर्याप्त रोशनी नहीं होने से खतरा और बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले छह महीनों में कम से कम 8 लोग नाले में गिरकर घायल हो चुके हैं। मवेशी भी बार-बार गिर रहे हैं, ग्रामीणों को घायल अवस्था में बाहर निकालना पड़ता है। ग्राम चौपाल, शिविर और सीएलजी बैठकों में यह मुद्दा कई बार उठाया गया, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने ठोस कार्रवाई नहीं की।
ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि इस नाले को पीपीपी सेल का प्रोजेक्ट बताकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। आबादी के बीच स्टेट हाइवे पर बना यह नाला प्रशासनिक लापरवाही और घटिया निर्माण की परतें खोल रहा है। समय रहते स्थायी मरम्मत नहीं हुई तो बड़ा हादसा हो सकता है। जल्द मरम्मत का आश्वासन पीपीपी प्रोजेक्ट के मैनेजर दीपांशु अग्रवाल ने बताया कि सभी गांवों में क्षतिग्रस्त नालों का सर्वे कराया जा रहा है और शीघ्र ही मरम्मत कार्य शुरू किया जाएगा। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि आश्वासन पहले भी मिल चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक सुधार नहीं हुआ। 13 गांवों में समान स्थिति केवल पनवाड़ ही नहीं, बल्कि कालारेवा, कैथूनी, उम्मेदपुरा, धुलेट सहित 13 गांवों में बने भूमिगत नालों के ऊपरी स्लैब टूट चुके हैं। इससे पूरे क्षेत्र में दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि शीघ्र मरम्मत नहीं की गई तो आंदोलन किया जाएगा। छह महीने में कई बड़े हादसे 2 फरवरी को मध्यप्रदेश से आ रहा एक ट्रेलर पनवाड़ के मध्य क्षतिग्रस्त स्लैब में धंस गया, जिससे यातायात बाधित रहा। एक माह पूर्व एक गाय भी नाले में गिर गई, जिसे मशीन की सहायता से बाहर निकाला गया। लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में खुले नाले के कारण भय का वातावरण है। घटिया निर्माण की खुली पोल सरखंडिया प्रशासक कमलेश मेहता, पनवाड़ प्रशासक देवराज सिंह सोलंकी और जिला परिषद सदस्य राकेश सोनी ने बताया कि करीब तीन वर्ष पूर्व बने इस हाइवे नाले का निर्माण घटिया सामग्री से किया गया था। निर्माण के एक वर्ष के भीतर ही स्लैब क्षतिग्रस्त होने लगे थे, जो गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि मरम्मत के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई गईं, स्थायी समाधान नहीं किया गया।
Aima media jhalawar

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