छत्तीसगढ़ का चर्चित उप अभियंता भर्ती घोटाला: हाईकोर्ट ने निरस्त की नियुक्तियां, सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम राहत
छत्तीसगढ़ का चर्चित उप अभियंता भर्ती घोटाला: हाईकोर्ट ने निरस्त की नियुक्तियां, सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम राहत
रायपुर/बिलासपुर | विशेष रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत वर्ष 2011-12 में हुई उप अभियंता (सिविल) भर्ती एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बहुचर्चित भर्ती मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर की डिवीजन बेंच द्वारा कई नियुक्तियों को अवैध घोषित किए जाने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर यथास्थिति (स्टे) प्रदान कर दी है। इस घटनाक्रम से मामला और अधिक संवेदनशील एवं चर्चित हो गया है।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा वर्ष 2011-12 में उप अभियंता (सिविल) के 275 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। आरोप है कि बाद में विभाग ने बिना संशोधित विज्ञापन जारी किए 108 अतिरिक्त पद सृजित कर दिए और उन पर भी भर्ती कर ली।
इस भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे, जिनमें प्रमुख रूप से—
89 अभ्यर्थियों पर गलत जानकारी देकर परीक्षा में शामिल होने का आरोप
आवेदन की अंतिम तिथि तक आवश्यक शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं होने के बावजूद चयन
अतिरिक्त पदों पर भर्ती में आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं करना
भर्ती प्रक्रिया को टुकड़ों-टुकड़ों में पूरा करना
इन आरोपों को लेकर लगातार शिकायतें, जांच और आपत्तियां दर्ज कराई गईं, लेकिन लंबे समय तक विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दिए थे जांच के आदेश
मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने धारा 156(3) के तहत 9 अगस्त 2021 को जांच और कार्रवाई के आदेश दिए थे।
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
बाद में एक आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा दायर रीट याचिका और रीट अपील क्रमांक 661/2025 पर सुनवाई करते हुए 3 फरवरी 2026 को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर की डिवीजन बेंच ने महत्वपूर्ण निर्णय दिया।
न्यायालय ने—
निजी प्रतिवादी क्रमांक 4 से 73 (55 और 64 को छोड़कर) की नियुक्तियों को
अवैध और प्रारंभ से शून्य घोषित किया
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में कार्यरत इन उप अभियंताओं की नियुक्तियां निरस्त कर दीं
न्यायालय ने अपने आदेश में इन नियुक्तियों को राहत देने से भी इनकार कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम राहत
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ प्रभावित पक्ष द्वारा सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई।
10 फरवरी 2026 को मामला सुप्रीम कोर्ट में दर्ज हुआ
11 फरवरी 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुआ
उसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर यथास्थिति (स्टे) प्रदान कर दिया
अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।
आगे क्या होगा
सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला इस मामले में निर्णायक होगा। यदि हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रहता है तो संबंधित पद रिक्त होंगे, वहीं यदि सुप्रीम कोर्ट राहत देता है तो नियुक्तियां जारी रह सकती हैं।
यह मामला छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित भर्ती विवादों में शामिल हो गया है और हजारों बेरोजगार अभ्यर्थियों की नजर अब सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई है।