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जिला कारागार मथुरा बना बंदी सुधार ग्रह — कैदियों के हाथों से सजेगी इस बार की होली, हर्बल गुलाल से बिखरेंगी खुशियाँ मथुरा

जिला कारागार मथुरा अब सिर्फ सजा काटने की जगह नहीं, बल्कि बंदी सुधार ग्रह के रूप में नई पहचान बना रहा है। यहां बंदियों को समय-समय पर रोजगारपरक प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि सजा पूरी कर बाहर निकलने के बाद वे स्वयं उद्यमी बन सकें और दूसरों को भी रोजगार दे सकें।
इसी क्रम में आगामी होली के अवसर पर कारागार के बंदी पूरी तरह प्राकृतिक और बिना केमिकल हर्बल गुलाल तैयार कर रहे हैं। चुकंदर, गाजर, पालक और हल्दी जैसी सब्जियों व फलों से हरा, पीला और गुलाबी रंग बनाया जा रहा है — जो त्वचा के लिए सुरक्षित होने के साथ पर्यावरण-अनुकूल भी है।
कारागार प्रशासन के अनुसार, इन हर्बल गुलाल की बिक्री के लिए जिला कारागार के समीप मुलाकात घर पर विशेष स्टाल लगाया जाएगा। साथ ही 22 फरवरी को डैंपियर नगर स्थित पाञ्चजन्य ऑडिटोरियम में आयोजित होने वाले विधिक साक्षरता शिविर में भी बंदियों द्वारा तैयार उत्पाद जनता के समक्ष प्रदर्शित किए जाएंगे।
इस प्रदर्शनी में केवल गुलाल ही नहीं, बल्कि भगवान जी की पोशाक, हथकरघा से बनी साड़ियां, तौलिये सहित कई हस्तनिर्मित वस्तुएं भी उपलब्ध रहेंगी, जिन्हें आमजन सीधे खरीद सकेंगे।

जेल अधीक्षक अंशुमन गर्ग वर्जन
यह पहल न सिर्फ बंदियों के हुनर को मंच दे रही है, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे रही है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलें तो हर इंसान नई शुरुआत कर सकता है।

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