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*'ध्रुवतारा एवं नदी विमर्श' विषय पर विश्वविद्यालय संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ कृष्णकान्त झा का हुआ ऑनलाइन व्याख्यान*

*'ध्रुवतारा एवं नदी विमर्श' विषय पर विश्वविद्यालय संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ कृष्णकान्त झा का हुआ ऑनलाइन व्याख्यान*

* श्री शंकर शिक्षायतन, वैदिक शोध संस्थान द्वारा प्रायोजित "जगद्गुरुवैभवम्" विषय पर सप्त दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित*

श्री शंकर शिक्षायतन, वैदिक शोध संस्थान, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित राष्ट्रीय "जगद्गुरु वैभवम्" विषय पर सप्त दिवसीय कार्यशाला के समापन के अवसर पर ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के पीजी संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ कृष्णकान्त झा मुख्य वक्ता के रूप में "ध्रुवतारा एवं नदी विमर्श" विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान दिया। कार्यशाला में 100 से अधिक देश-विदेश के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं भारतीय संस्कृति के अनुरागियों ने भाग लिया। व्याख्यान का निर्धारित विषय समीक्षा चक्रवर्ती मधुसूदन ओझा द्वारा रचित "जगद्गुरुवैभवम्" ग्रन्थ में वर्णित 'ध्रुवतारा एवं नदी विमर्श' था। डॉ झा द्वारा इस व्याख्यान के माध्यम से वैदिक वाड़्मय से प्राप्त मानव जाति का आज से लगभग 15000 वर्ष पूर्व के इतिहास का प्रमाणिक विवेचन प्रस्तुत किया गया। लक्ष्मी कान्त विमल के संचालन में आयोजित समारोह में बीएचयू, वाराणसी के प्रो शैलेश कुमार तिवारी द्वितीय मुख्य वक्ता थे, जबकि जेएनयू, नई दिल्ली के प्रो संतोष कुमार शुक्ल ने अध्यक्षता की।

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