हिंदी vs अंग्रेजी और सरकारी काम काज
जैसा कि हम सभी जानते है किसी भी सरकारी काम को स्वयं से करवाना मतलब खुद के लिए खुद से परेशानी पैदा करने जैसा ही है । लेकिन इस बार समस्या दूसरे किस्म की है मै स्वयं कुछ कागजों में भाषाई त्रुटि होने की वजह से नगर निगम जाता हूं अच्छा आश्चर्य की बात ये है मेरे कागजों में हिंदी में सब कुछ सही है लेकिन उसी कागज के अंग्रेजी प्रिंट में कुछ गलती जो कि एक विभागीय कर्मचारी की गलती से हुआ होगा अब इस विभागीय गलती में मै और मेरे जैसे बहुत से लोग रोज किसी न किसी विभाग के चक्कर लगाते ही है । अब मेरे कहने का मतलब सिर्फ इतना सा है कि जब हिंदी हमारी मात्रा भाषा है तो हिंदी में बने हुए सरकारी दस्तावेज सरकार द्वारा ही बनाए हुए दस्तावेज क्यों मान्य नहीं । गलतियां है जिन्हें सही होना चाहिए लेकिन जनता की परेशानी की कीमत पर नहीं। जब सरकारी कर्मचारी द्वारा ये कहा जाता है कि जाइए आप ये सही करवाए और फिर आए तो उसके दिमाग में केवल एक ही प्रश्न उठता है क्या मैने ये कागज अपने घर में बनाए है ? फिर उस कागज को सही कराने के लिए महीनों का चक्कर लगाना पड़ता है जिसमें उसका कीमती समय और पैसा दोनों खर्च होता है।