
डिब्रूगढ़ में 𝑨𝑨𝑺𝑼 (ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन) की डिब्रूगढ़ इकाई ने कुछ निर्माण परियोजनाओं को लेकर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।
संगठन का दावा है कि कुछ ठेकेदार/निर्माण कंपनियाँ कथित रूप से “मिया” सरदारों के माध्यम से बांग्लादेशी मूल के “मिया मुस्लिम” श्रमिकों को राज्य में ला रही हैं और उन्हें स्थानीय निवासी दिखाने के लिए कथित तौर पर जाली कागजात तैयार कराए जा रहे हैं। 𝑨𝑨𝑺𝑼 के अनुसार, जिन निर्माण फर्मों के नाम आरोपों में सामने आए हैं उनमें अमर कंस्ट्रक्शन, जेएसबी बिल्डर्स, बीएन गरोडिया और एसके डेवलपर्स शामिल हैं। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ व्यक्तियों को जिनमें अमर कंस्ट्रक्शन से जुड़े “हलीम” तथा “ऐनुल”, “मैबुल”, “खुदा बख्श”, “सलीम शेख” और “सैयद अली” जैसे नाम शामिल बताए गए इन श्रमिकों की कथित सोर्सिंग/भर्ती और दस्तावेज़ी प्रक्रिया में लगाया गया। छात्र संगठन का कहना है कि मामला केवल श्रम-आपूर्ति का नहीं, बल्कि राज्य की सुरक्षा, वैधानिक पहचान, और स्थानीय युवाओं के रोजगार अधिकार से भी जुड़ा है। 𝑨𝑨𝑺𝑼 ने आरोप लगाया कि यदि बाहरी/अवैध श्रमिकों को स्थानीय दिखाकर काम पर लगाया जा रहा है, तो यह न सिर्फ प्रशासनिक तंत्र की विफलता को दर्शाता है, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से नियमों को दरकिनार करने का संकेत भी देता है। संगठन ने मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा से मांग की है कि आरोपों की सत्यता सामने आने पर संबंधित कंपनियों के श्रम लाइसेंस और ठेका लाइसेंस तत्काल रद्द किए जाएँ तथा पूरे नेटवर्क कंपनियों, सरदारों, दस्तावेज़ तैयार करने वालों और श्रमिकों की पहचान प्रक्रिया की व्यापक और निष्पक्ष जांच कराई जाए। 𝑨𝑨𝑺𝑼 ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस सत्यापन, श्रम विभाग की निगरानी, पहचान-पत्रों की जांच, तथा निर्माण स्थलों पर नियमित निरीक्षण को तत्काल सख्त किया जाना चाहिए। संगठन का स्पष्ट कहना है कि यदि ये आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रहेगा बल्कि राज्य और राष्ट्र के प्रति गंभीर विश्वासघात की श्रेणी में आएगा। फिलहाल, ये सभी आरोप 𝑨𝑨𝑺𝑼 द्वारा लगाए गए हैं; प्रशासनिक जांच/आधिकारिक पुष्टि के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।