
पूर्व असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए अपने इस्तीफे को लेकर विस्तार से अपनी पीड़ा सार्वजनिक की है।
उन्होंने कहा कि उन्होंने कांग्रेस को 32 वर्ष दिए, संघर्ष किया, कई बार अपमान सहा, यहां तक कि राहुल गांधी की मौजूदगी में उनके साथ धक्का-मुक्की हुई और नाक पर चोट लगी, जिससे रक्तस्राव तक हुआ। बोरा के अनुसार, इसके बावजूद उन्होंने संगठन के लिए काम करना जारी रखा। भूपेन बोरा ने खुलासा किया कि उन्होंने लगभग एक महीने पहले सांसद गौरव गोगोई को पत्र लिखकर स्पष्ट किया था कि यदि उनकी उपेक्षा जारी रही तो वे उनके खिलाफ प्रेस वार्ता करेंगे, क्योंकि वे इस प्रकार का अपमान और बर्दाश्त नहीं कर सकते। उन्होंने उस पत्र की प्रति कांग्रेस विधायक दल (CLP) के नेता जितेंद्र सिंह को भी भेजी, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। बोरा ने कहा कि उसी समय उन्हें महसूस हुआ कि अब पार्टी में उनकी आवश्यकता नहीं रह गई है, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा देने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि इस्तीफे के बाद कांग्रेस हाईकमान ने उनसे बातचीत की। राहुल गांधी ने 2007 से चले आ रहे अपने संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने बोरा की कई बार मदद की थी। हालांकि, बोरा ने यह भी आरोप लगाया कि उनके इस्तीफे में उठाए गए मूल मुद्दों पर किसी ने गंभीर चर्चा नहीं की। उनके अनुसार, व्यक्तिगत संबंधों की बात तो हुई, लेकिन संगठनात्मक समस्याओं और अपमान के मुद्दे पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। गौरव गोगोई पर निशाना साधते हुए भूपेन बोरा ने कहा कि वे पार्टी के अध्यक्ष के रूप में सिर्फ “चेहरा” हैं और संगठन पर उनका वास्तविक नियंत्रण नहीं है। उन्होंने दावा किया कि धुबरी से सांसद रकीबुल हुसैन ही पार्टी के वास्तविक आधार और संचालन शक्ति हैं। बोरा के इन बयानों से असम कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर सार्वजनिक बहस का विषय बन गई है और आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर और अधिक हलचल की संभावना जताई जा रही है।