
मोहन यादव सरकार का 'सियासी प्रपंच': सुप्रीम कोर्ट में सामान्य वर्ग को बताया 'भेदभावी', सत्ता के लिए समाज में जहर घोलने की साजिश!
— डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल
भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने प्रदेश में आरक्षण की राजनीति को साधने के लिए एक ऐसा दांव चला है, जिसने पूरे प्रदेश के सामाजिक ताने-बाने को झकझोर कर रख दिया है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे के जरिए सरकार ने सामान्य वर्ग (सवर्ण समाज) पर पिछड़ों के साथ भेदभाव करने का जो गंभीर आरोप मढ़ा है, उसे लेकर अब प्रदेश की राजनीति में उबाल आ गया है।
क्या है विवादित हलफनामा? सरकार द्वारा पेश किए गए सर्वे के आंकड़ों (सारणी 6.15) में यह दावा किया गया है कि मध्य प्रदेश में 38.39% सामान्य वर्ग के लोग अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के साथ पानी तक नहीं पीते। हलफनामे में स्पष्ट लिखा है कि अन्य जातियों (विशेषकर उच्च जाति) के लोग पिछड़ों के साथ पानी नहीं पीते हैं।
यह केवल एक सरकारी आंकड़ा नहीं, बल्कि सामान्य वर्ग के खिलाफ तैयार की गई एक ऐसी राजनीतिक पटकथा है, जो आधुनिक भारत की जमीनी सच्चाई से कोसों दूर नजर आती है।
जमीनी हकीकत बनाम सरकारी फसाना : आज के दौर में जब समाज के हर वर्ग के लोग होटलों, दफ्तरों और सार्वजनिक स्थानों पर एक साथ बैठकर खाना खाते हैं, वहां सरकार का यह तर्क गले नहीं उतर रहा। सवाल यह उठता है कि:
• क्या आज का ब्राह्मण, राजपूत या बनिया किसी होटल में खाना खाने से पहले वेटर या रसोइये की जाति पूछता है?
• क्या सार्वजनिक जीवन में "सबका साथ, सबका विकास" का नारा देने वाली भाजपा, कोर्ट की चौखट पर सवर्णों को 'अपराधी' और 'छुआछूत करने वाला' साबित करना चाहती है?
सत्ता के लिए 'अपनों' की ही बलि? आरोप लग रहे हैं कि मुख्यमंत्री मोहन यादव अपनी कुर्सी बचाने और वोट बैंक की राजनीति के लिए समाज को बांटने का काम कर रहे हैं। सवर्ण समाज का कहना है कि प्रशासन और सत्ता वर्षों से भाजपा के पास है, फिर भी कोर्ट में जाकर यह कहना कि समाज में जहर फैला है, सरकार की अपनी विफलता या फिर एक सोची-समझी सरकारी साजिश है।
"यह हलफनामा नहीं, सवर्णों को बदनाम करने का 'डेथ वारंट' है। जब वोट चाहिए तब हम हिंदू हैं, और जब आरक्षण बढ़ाना हो तब हम भेदभाव करने वाले विलेन?" — यह आक्रोश अब सवर्ण गलियारों में गूंजने लगा है।
बीजेपी मुक्त मध्य प्रदेश का संकल्प? सोशल मीडिया और सवर्ण संगठनों के बीच अब इस अपमान का बदला लेने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि एक मुख्यमंत्री की सोच इतनी संकुचित कैसे हो सकती है कि वह एक पूरे वर्ग को कोर्ट में कटघरे में खड़ा कर दे। अब 'सवर्ण समाज' इस अपमान को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है और प्रदेश में 'भाजपा मुक्त मध्य प्रदेश' की शपथ लेने की तैयारी कर रहा है।