
आस्था विश्वाश धर्म का मनोविज्ञान
केंद्र और परिधि: सच्ची आस्था की परीक्षा
भगवान का मतलब वह केंद्र है, हम उसकी परिधि हैं। केंद्र कभी परिवर्तन नहीं करता। जब हमने उस केंद्र को अपना भगवान या गुरु बना लिया, तभी सच्ची संभावना का द्वार खुलता है।
जिसने केंद्र को समझ लिया, उसे भगवान की फोटो, गुरु की तस्वीर, गीता के श्लोक या शास्त्रों के किसी प्रमाण की कोई जरूरत नहीं पड़ती। वह जानता है कि सत्य स्वयं प्रकाशमान है। लेकिन जो अभी तक केंद्र को पक्का नहीं कर पाया, वह निरंतर खोज में रहता है। वह बार-बार सबूत मांगता है, भीड़ से पुष्टि चाहता है।
इसीलिए सोशल मीडिया पर भगवान, गुरु, धर्म, शास्त्र और मंत्रों का इतना प्रचार होता है। लोग फोटो शेयर करते हैं, श्लोक पोस्ट करते हैं, क्योंकि उनके भीतर अपने केंद्र पर गहरी आस्था और विश्वास नहीं टिका है। वे दूसरों को मनाने की कोशिश करके खुद को मनाने की कोशिश करते हैं। जितने ज्यादा फॉलोअर्स, लाइक्स और शेयर होंगे, उतना ही उनका अपना केंद्र मजबूत साबित होगा — यही उनका प्रमाण बन जाता है।
देखिए ना, अपनी माँ, अपने बाप या अपनी पत्नी पर पूरा विश्वास हो तो क्या आप उन्हें साबित करने के लिए प्रचार करते हैं? नहीं। क्योंकि सच्चा विश्वास अंदर से आता है, बाहर से थोपा नहीं जा सकता।
जिस दिन आपके भीतर अपने भगवान, अपने धर्म, अपने गुरु, अपने मंत्र और अपने शास्त्र के प्रति अटूट श्रद्धा जाग जाएगी, उस दिन आपको कोई फोटो, कोई श्लोक या कोई धर्म का प्रचार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रचार दरअसल खालीपन का प्रमाण है। जो व्यक्ति प्रचार करता है, उसे खुद भी नहीं पता होता कि वह क्यों कर रहा है। वह बस भीतर के शून्य को आवाज देकर भरने की कोशिश कर रहा होता है।
व्यापार की तरह सोचिए। अगर दुकान अच्छी है और प्रोडक्ट उत्तम है, तो प्रचार की कोई जरूरत नहीं पड़ती — ग्राहक खुद आते हैं। लेकिन अगर प्रोडक्ट में खामी है या दुकान ठीक से नहीं चल रही, तब भारी-भरकम विज्ञापन और प्रचार की जरूरत पड़ती है।
आज सोशल मीडिया पर भगवान, धर्म, ईश्वर, गुरु, शास्त्र और मंत्रों का जो 24×7 प्रचार हो रहा है, वह इसी बात का संकेत है कि 99% लोगों के भीतर इन पर सच्चा विश्वास नहीं है। वे प्रचार कर रहे हैं क्योंकि उन्हें खुद पर, अपने केंद्र पर भरोसा नहीं है।
सच्चा साधक चुपचाप केंद्र में स्थित हो जाता है। वह प्रचार नहीं करता — वह उदाहरण बन जाता है।
जब आस्था अंदर से पक्की हो जाती है, तब बाहर का कोई प्रमाण, कोई लाइक, कोई शेयर, कोई फॉलोअर की जरूरत नहीं रहती।
वह केंद्र अटल रहता है — और परिधि स्वतः शांत हो जाती है।