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मुंबई क्लाइमेट वीक में झारखंड की सियारी पंचायत का लो-कार्बन मॉडल बना चर्चा का विषय

मुंबई/रांची, 19 फरवरी: मुंबई में चल रहे क्लाइमेट वीक 2026 में झारखंड की सियारी पंचायत चर्चा का विषय बनी हुई है। पंचायत के मुखिया रामवृक्ष मुर्मु को अपनी पंचायत में सोलर एनर्जी और जलवायु अनुकूल विकास कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। मुर्मु ने विकास कार्यों में जलवायु समर्थ योजनाएं अपनाने की पहल को मुंबई में साझा किया। उन्होंने बताया कि अगर पंचायतों और मुखियाओं को जलवायु परिवर्तन के संबंध में जागरूक किया जाए तो स्थानीय नेतृत्व और सही योजना के जरिए छोटे-छोटे गांव भी कम कार्बन उत्सर्जन वाले और सुरक्षित आजीविका वाले भविष्य की दिशा में काम कर सकते हैं।
बता दें कि मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ‘पंचायत लीडिंग इंडियाज’ क्लाइमेट चार्ज’ सत्र में रामवृक्ष मुर्मू ने झारखंड, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल से आए अन्य पंचायत प्रतिनिधियों के साथ मंच साझा किया। सभी प्रतिनिधियों ने स्थानीय स्तर पर जलवायु परिवर्तन से निपटने में ग्राम पंचायतों की भूमिका पर बात रखी।
सौर ऊर्जा को दी प्राथमिकता
अपने संबोधन में मुर्मू ने बताया कि बार-बार होने वाली बिजली कटौती से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। उन्होंने कहा,
“कॉन्फ्रेंस ऑफ पंचायत (CoP) में हुई चर्चाओं से हमें समझ आया कि बिजली की समस्या केवल स्थानीय नहीं, बल्कि जलवायु संकट से भी जुड़ी है। इसके बाद पंचायत ने सीएसआर फंड की मदद से 72 सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने का फैसला किया, ताकि बच्चे रात में सुरक्षित माहौल में पढ़ सकें।”
इसके अलावा पंचायत ने स्कूलों और सामुदायिक भवनों में सोलर सिस्टम लगाए और मुख्य तालाब पर सोलर आधारित लिफ्ट सिंचाई पंप स्थापित किया, जिससे अनियमित बिजली और महंगे डीज़ल पर निर्भरता कम हुई। मुर्मु ने बताया कि उन्होंने अपनी पंचायत में डीएमएफटी फंड से भी कई विकास कार्य कराए हैं।
साथ ही पंचायत ने बिरसा मुंडा बागवानी मिशन के तहत ग्रामीणों के सहयोग से 2,880 आम के पौधे और 800 अन्य फलदार व छायादार पेड़ लगाए, जिससे जंगल आधारित आजीविका को भी मजबूती मिली।
मुर्मू ने यह भी बताया कि ग्राम पंचायत हेल्प डेस्क ने इन योजनाओं के लिए सही सरकारी स्कीम और तकनीकी सहयोग प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह पहल असर सोशल इम्पैक्ट एडवाइजर्स, पॉलिसी एंड डेवलपमेंट एडवाइजरी ग्रुप (PDAG), दामोदर बचाओ अभियान और कॉमन ग्राउंड इनिशिएटिव के सहयोग से झारखंड में चलाए जा रहे कॉन्फ्रेंस ऑफ पंचायत (CoP) कार्यक्रम का हिस्सा है।
पीडीएजी के सह-संस्थापक और पार्टनर अरिंदम बनर्जी ने बताया कि कॉन्फ्रेंस ऑफ पंचायत (CoP) की शुरुआत स्थानीय शासन संस्थाओं की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है, ताकि वे जलवायु से जुड़े जोखिमों का सामना बेहतर तरीके से कर सकें। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पहल 2028 तक देशभर में स्थानीय स्तर पर जलवायु कार्रवाई के लिए एक साझा मंच तैयार करने में मदद करेगी।
असर की सीईओ विनुता गोपाल ने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों से आए पंचायत प्रतिनिधियों ने दिखाया है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर ठोस काम पहले से हो रहा है—चाहे वह पेड़ लगाना हो, सोलर पैनल लगाना हो या गांव की कार्ययोजनाओं को लागू करना हो।मुंबई क्लाइमेट वीक (17-19 फरवरी) भारत का पहला ऐसा मंच है, जहां स्थानीय स्तर पर किए जा रहे जलवायु समाधानों को साझा करने और उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने पर चर्चा की गई।

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