
झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर विक्रम शर्मा की देहरादून में दिनदहाड़े हत्या के बाद उत्तराखंड पुलिस ने कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया ह
झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर विक्रम शर्मा की देहरादून में दिनदहाड़े हत्या के बाद उत्तराखंड पुलिस ने कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। 13 फरवरी 2026 को सिल्वर सिटी मॉल के पास जिम से निकलते समय विक्रम शर्मा पर हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिसमें उनकी मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर चुकी है।
पुलिस मुख्यालय ने डीजीपी दीपम सेठ के निर्देश पर पूरे राज्य में व्यापक सत्यापन अभियान शुरू कर दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य संदिग्ध व्यक्तियों को शरण देने वालों पर सख्त कार्रवाई करना और अपराधियों के लिए राज्य में कोई जगह न छोड़ना है। डीजीपी का स्पष्ट संदेश है—“अपराधियों के लिए प्रदेश में कोई जगह नहीं। कानून से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई तय है।”
अभियान के प्रमुख बिंदु:
रियल एस्टेट और प्रॉपर्टी डीलरों पर नजर — प्रॉपर्टी डीलर, रियल एस्टेट एजेंट और ब्रोकर का अनिवार्य सत्यापन होगा। उनके माध्यम से हुए किरायेदारी अनुबंधों की जांच की जाएगी। बिना पुलिस वेरिफिकेशन के किराया देना या संदिग्ध को आश्रय देना भारी पड़ सकता है।
होटल, पीजी, होम-स्टे और आश्रमों की जांच — मल्टी-स्टोरी अपार्टमेंट, किराए के मकान, फ्लैट, पीजी, होटल, गेस्ट हाउस, आश्रम और धर्मशालाओं में रहने वालों का सत्यापन अनिवार्य होगा।
ई-कॉमर्स और डिलीवरी एजेंटों का विशेष सत्यापन — Amazon, Zomato, Blinkit जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े डिलीवरी एजेंटों की पहचान और रिकॉर्ड की जांच प्राथमिकता पर होगी। सिक्योरिटी एजेंसी स्टाफ, कैब ड्राइवर और इंडस्ट्रियल एरिया के ठेकेदार भी रडार पर रहेंगे।
सीसीटीवी और सुरक्षा कर्मियों की पड़ताल — मॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, कोचिंग, स्कूल, विश्वविद्यालय, जिम, ट्रांसपोर्ट एजेंसी, ब्यूटी पार्लर आदि में लगे सीसीटीवी की गुणवत्ता, रिकॉर्डिंग और सुरक्षा कर्मियों का चरित्र सत्यापन अनिवार्य होगा। सुरक्षा ब्रीफिंग भी जरूरी।
अवैध प्रवासियों पर सख्ती — विशेषकर बांग्लादेशी घुसपैठियों और वीजा ओवरस्टे करने वाले विदेशी नागरिकों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।
वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं की सुरक्षा — एकल नागरिकों, वरिष्ठों का चिन्हीकरण कर उनकी सुरक्षा का मूल्यांकन होगा। घरेलू सहायकों, ड्राइवर, केयरटेकर आदि का अनिवार्य सत्यापन होगा।
अभियान की मॉनिटरिंग:
जनपदीय पुलिस के साथ एलआईयू, एसओजी और एसटीएफ संयुक्त रूप से काम करेंगे। हर थाना स्तर पर फील्ड टीमें गठित की गई हैं। सीओ से आईजी रेंज तक समीक्षा व्यवस्था लागू है। थाना स्तर पर जवाबदेही तय की गई है।
यह अभियान उत्तराखंड को अपराध मुक्त और सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हाल की घटनाओं से सबक लेते हुए पुलिस ने साफ कर दिया है कि अब संदिग्धों को किसी भी रूप में शरण नहीं मिलेगी। आम जनता से अपील है कि वे संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को दें।