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गाँवों के हर मकान की अद्वितीय आईडी है घरौनी

संवाददाता: देव ठाकुर

बदायूँ। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली आबादी के घरों का कोई नक्शा या नम्बर नहीं होता है। जमीन के जिस भाग पर विभिन्न वर्गों के परिवार मकान बनाकर रहते हैं, उस क्षेत्र को राजस्व विभाग के नक्शे में आबादी क्षेत्र घोषित किया गया है। आबादी क्षेत्र में बहुत से परिवारों के घर होते है, किन्तु इस घर पर किसी के नाम से वह मकान नहीं होता है। ऐसी स्थिति में स्वामित्व व कब्जों को लेकर गाँवों में पारिवारिक या पडोसी से विवाद मारपीट व मुकदमेबाजी भी होती है। ग्रामीण समाज में शान्ति, सौहार्द आपसी भाई चारा बनाये रखने और आवासों का स्वामित्व बनाये रखने के उद्देश्य से भारत सरकार की ष्स्वामित्व योजनाष् के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण आबादी सर्वेक्षण, एवं अभिलेख संक्रिया विनियामली, 2020 प्रख्यापित की है। जिसके अन्तर्गत आवास स्वामी को घरौनी दी जाती है।
राज्य सरकार की इस विनियमावली के अन्तर्गत ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में अवस्थित भूमि, भवन एवं सम्पत्तियों का सर्वेक्षण कराकर ग्रामीण आवासीय अभिलेख (घरौनी) तैयार कर सम्बन्धित गृह स्वामियों को उपलब्ध कराया जाता है। राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना जारी कर ग्रामीण आबादी क्षेत्र के सर्वेक्षण का कार्य जिलाधिकारियों/जिला अभिलेख अधिकारियों द्वारा प्रसारित कर कराया जा रहा है। सर्वेक्षण प्रक्रिया में सर्वप्रथम ग्राम सभाओं की बैठक कर सभी ग्रामवासियों को इस विनियमावली की जानकारी दी जाती है। तत्पश्चात ग्राम के आबादी क्षेत्र की सभी निजी, सरकारी अर्ध सरकारी भूमि, भवन एवं सम्पत्तियों को चिन्हीकरण किया जाता है। चिन्हीकरण के पश्चात आबादी क्षेत्र को ड्रोन द्वारा सर्वेक्षण फोटो लिए जाते हैं, जिसके आधार पर आबादी क्षेत्र का मानचित्र तैयार किया गया है। मानचित्र के आधार पर आबादी भूखण्डों की नम्बरिंग कर सभी गृह स्वामियों एवं सरकारी सम्पत्तियों की सूची बनाकर ग्राम पंचायत की बैठक में प्रकाशित किया जाता है।
घरौनियों हेतु सम्पत्तियों की सूची के प्रकाशन के उपरान्त उप जिलाधिकारी द्वारा आपत्तियों आमंत्रित कर उनका निस्तारण सुलह समझौते के आधार पर किया जाता है। उप जिलाधिकारी/सहायक अभिलेख अधिकारी के निस्तारण के विरुद्ध जिलाधिकारी/जिला अभिलेख के समक्ष आपत्ति दाखिल की जा सकती है। जिलाधिकारी/जिला अभिलेख अधिकारी द्वारा सम्बन्धित पक्षों को सुनवाई का अवसर देकर आपत्ति का निस्तारण करते है। सभी त्रुटियों, समझौते एवं आपत्तियों के निस्तारण के पश्चात गृह स्वामीवार ग्रामीण आवासीय अभिलेख (घरौनी) एवं संशोधित मानचित्र तैयार किया जाता है। जिसकी पुष्टि सहायक अभिलेख अधिकारी द्वारा की जाती है। ग्रामीण आवासीय अभिलेख (घरौनी) तैयारी हो जाने के पश्चात जिलाधिकारी द्वारा ग्राम के आबादी सर्वेक्षण एवं अभिलेख संक्रिया पूर्ण होने की अधिसूचना का प्रस्ताव शासन को प्रेषित किया जाता है।
प्रदेश में नवीनतम ड्रोन प्रौद्योगिकी के उपयोग से ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर उनके स्वामित्व संबंधी अभिलेख तैयार कराने हेतु प्रदेश में कुल 1,10,344 ग्रामों को अधिसूचित किया गया है, जिनमें संचालित ‘‘स्वामित्व योजना‘‘ के अन्तर्गत प्रदेश में गैर आबाद आदि ग्रामों को छोड़कर कुल 90530 ग्रामों में वास्तविक रूप से ड्रोन सर्वेक्षण एवं घरौनी तैयार किये जाने की कार्यवाही की जा रही है। दिसम्बर, 2025 तक समेकित रूप से सभी 90530 ग्रामों का ड्रोन सर्वेक्षण पूर्ण हो गया है। प्रदेश में अब तक 71344 ग्रामों में कुल 1,09,11,057 ग्रामीण आवासीय अभिलेख (घरौनी) तैयार/वितरित की जा चुकी है। संवाद

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