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ऊर्जा

जब “मैं” मिट जाता है,
तब ऊर्जा खुद बोलती है —
“अब तू मेरा, मैं तेरी…
न तू मालिक, न मैं दासी।
दोनों एक, एक ही नृत्य,
एक ही श्वास, एक ही हँसी।
पी ले इस शराब को,
जिसमें कोई नशा नहीं,
कोई सुबह नहीं,
कोई पछतावा नहीं।
पी ले…
फिर देख —
तेरा ‘मैं’ कहाँ खो गया,
और तू कहाँ समा गया।”

𝐕𝐞𝐝𝐚𝐧𝐭 𝟐.𝟎 𝐋𝐢𝐟𝐞 — 𝐋𝐢𝐟𝐞 𝐢𝐬 𝐃𝐢𝐯𝐢𝐧𝐞, 𝐚𝐧𝐝 𝐭𝐡𝐞 𝐃𝐢𝐯𝐢𝐧𝐞 𝐢𝐬 𝐋𝐢𝐟𝐞.

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