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​मेहनाजपुर का 'महा-घोटाला': सड़क के नाम पर बिछाई जा रही है 'भ्रष्टाचार की राख'! ​[विशेष रिपोर्ट: डॉ. अजीत पाण्डेय] | मेहनाजपुर, आजमगढ़ ​मेहनाजपुर।

​मेहनाजपुर का 'महा-घोटाला': सड़क के नाम पर बिछाई जा रही है 'भ्रष्टाचार की राख'!
​[विशेष रिपोर्ट: डॉ. अजीत पाण्डेय] | मेहनाजपुर, आजमगढ़
​मेहनाजपुर। शासन की आंखों में धूल झोंककर सरकारी खजाने पर डकैती कैसे डाली जाती है, इसका जीता-जागता सबूत सकिया-बकिया मार्ग पर देखने को मिल रहा है। यहाँ डामरीकरण के नाम पर जो 'काला खेल' खेला जा रहा है, वह न केवल मानकों की धज्जियां उड़ा रहा है, बल्कि क्षेत्र की जनता के भरोसे का कत्ल भी कर रहा है।
​🚨 मौके की हकीकत: सड़क है या बिस्कुट?
​निर्माण कार्य का जायजा लेने पर जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं:
​बिना झाड़ू लगाए डामरीकरण: नियमों को ताक पर रखकर, सड़क की धूल साफ किए बिना ही उस पर डामर (लुक) का छिड़काव कर दिया गया। मिट्टी और डामर का ऐसा मेल बनाया गया है कि सड़क जमीन से चिपक ही नहीं रही।
​हाथ से उखड़ती 'किस्मत': इस सड़क की मजबूती का आलम यह है कि कोई भी व्यक्ति अपने हाथ की उंगलियों से गिट्टियाँ (रोरी) बाहर निकाल सकता है। डामर की मात्रा इतनी कम है कि गिट्टियाँ आपस में जुड़ने के बजाय 'सूखी राख' की तरह बिखरी पड़ी हैं।
​बजरिया और रोरी का तमाशा: मानकों के विपरीत घटिया स्तर की बजरिया का उपयोग कर ठेकेदार अपनी जेबें भर रहा है। यह सड़क पहली बारिश तो क्या, भारी वाहनों का एक फेरा भी नहीं झेल पाएगी।
​💥 भ्रष्टाचार का 'सिंडिकेट' सक्रिय!
​स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह सब ठेकेदार और विभागीय इंजीनियरों की गहरी पैठ के बिना संभव नहीं है। मौके पर न तो कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद रहता है और न ही काम की गुणवत्ता की कोई मॉनिटरिंग हो रही है।
​"यह विकास नहीं, डकैती है। हमारे क्षेत्र की जनता के हक के पैसे को डामर की पतली परत के नीचे दफन किया जा रहा है।" — आक्रोशित ग्रामीण
​❓ जिला प्रशासन से सीधे सवाल:
​क्या PWD (लोक निर्माण विभाग) के उच्चाधिकारियों ने इस मार्ग का भौतिक सत्यापन किया?
​मानक विहीन सामग्री का प्रयोग किसके शह पर किया जा रहा है?
​क्या ठेकेदार पर कार्रवाई होगी या यह 'भ्रष्टाचार की गंगा' ऐसे ही बहती रहेगी?
​निष्कर्ष: मेहनाजपुर की जनता अब चुप बैठने वाली नहीं है। सकिया-बकिया मार्ग पर हो रहे इस 'घोटाले' की गूँज अब शासन तक पहुँचेगी। अगर गुणवत्ता में सुधार और दोषियों पर गाज नहीं गिरी, तो ग्रामीण इस भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।

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