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जिम्मेदारी उठाने की औकात नहीं तो शादी मांगते ही क्यों? जीवन दे नहीं सकते तो मौत बांटते ही क्यों?

होशियारपुर: 18 फरवरी,2026 (बूटा ठाकुर गढ़शंकर)
हकीकत है कि परिवार के बिना संसार अधूरा होता है, जीवन साथी के बिना जीवन सूना होता है। भगवान ने हर प्राणी व जीव जंतु को नर मादा के रूप में बनाया है ताकि संसार में प्रेम और करुणा हमेशा बनी रहे। मानव को हर प्राणी से ज्यादा समझदार और जिम्मेवार बनाया ताकि वह सब प्राणियों की रक्षा कर सके और संसार को खुशहाल बना सके। पर आज का मानव इतना खुदगर्ज और हिंसक हो चुका है कि अपने ही परिवार के प्यारे, नाजुक व बहु मुल्य रिश्तों पर खंजर घोंपने से पहले एक पल भी नहीं सोचता। साथ में बिताए अच्छे लम्हों का एक अंश तक नहीं सामने ला पाता। ज़हर का इतना लावा फूटता है कि अपनों को ही मौत बांट कर खुद भी नर्क भोगता है।
बीती रात की ही बात है जब राजपुरा के नजदीकी गांव खेड़ा गंडीयान के गुरमीत सिंह नामक व्यक्ति ने मामूली झगड़े में अपनी ही 28 साला पत्नि रमनप्रीत कौर को लोहे की पाइप से मार मुकाया। यह भयानक घटना उनकी दो बेटियां के सामने वापरी जो मात्र 10 और 8 साल की हैं। आप सोच सकते हो कि उन बच्चियों पर कितना गहरा आघात हुआ होगा। भले ही दोषी को फांसी या उम्र कैद होगी। पर सवाल पैदा होता है कि 10 साल का लंबा अरसा एक साथ निभाने बाद भी एक इंसान इतना खूंखार क्यों हो जाता है? 28 साल की उम्र में तो आजकल शादियां हो रही हैं जबकि एक महला को जान गंवानी पड़ी, दोषी सलाखों में रहेगा लेकिन दो मासूम बच्चीयों के जीवन की भी दशा दिशा बदल कर रखदी। कितना अच्छा होता कि इस मामूली झगड़े में कोई तो दो मिनिट के लिए शांत हो पाता। यह समाज को जरूर सोचना होगा।

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