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उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन

खानपुर कलां, 17 फरवरी। भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय, खानपुर कलां के विश्वविद्यालय स्वावलंबन केंद्र के अंतर्गत शिक्षा विभाग में “उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम” का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एम एस एम ई ) के अंतर्गत आयुक्त कार्यालय -एम एस एम ई द्वारा इ एस डी पी योजना के तहत प्रायोजित था। इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के डीन ऐकडेमिक प्रोफेसर विजय नेहरा, ने शिरकत की। प्रो विजय नेहरा ने कहा कि केवल शिक्षा ही कमाने का साधन नहीं है अपितु इसके अलावा भी बहुत क्षेत्र हैं जिनमें हम भविष्य बनाने के बारे में सोच सकते हैं और प्रयास कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय स्तर पर इस प्रकार के कार्यक्रम छात्राओं में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और व्यावसायिक समझ विकसित करने में सहायक सिद्ध होते हैं।कार्यक्रम के बतौर मुख्य वक्ता निदेशक, नवाचार अनुसंधान और प्रशिक्षण डॉ विवेक शुक्ला ने प्रतिभागियों को सम्बोधित किया । उन्होंने छात्राओं को 'क्षमता' शब्द के बारे में विस्तारपूर्वक बताया। उन्होंने छात्राओं को बताया कि मन स्थिति में बदलाव लाने के लिए शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन लाना जरूरी है। भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए युवावर्ग की क्षमता को प्रयोग में लाने की बात कही। उन्होंने विद्यार्थियों के समग्र विकास की अपेक्षा क्षमता विकास पर बल देने की बात कही। उन्होंने कहा कि एक अच्छा शिक्षक बनने के लिए विषय ज्ञान और भाषा पर अधिकार होना अनिवार्य है। इसके लिए उन्होंने व्यक्तिगत अधिग़म मार्ग को अपनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की क्षमताओं को सही दिशा देने में शिक्षक को अभिभावकों के साथ मिलकर कार्य करना चाहिए। कार्यशाला के अगले चरण में डॉ. श्रुति शंकर गौर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में वैश्विक दूरदर्शी, ने छात्राओं को व्यवसाय और उद्यमिता के अंतर को बारीकी से समझाया। उन्होंने बताया कि आत्म मूल्यांकन के द्वारा अपनी क्षमताओं को पहचान सकते हैं। उद्यमिता के सफर की शुरुआत समस्या से होती है और नवाचारों के द्वारा उन समस्याओं का समाधान किया जाता है।कार्यशाला के अंतिम चरण में एंटो पी. सी., संस्थापक सदस्य एवं सीईओ ऑफ नेस्ट क्रिएशन, मीडिया एजेंसी, दिल्ली, ने कहा कि शिक्षा केवल नौकरी और पैसा कमाने का जरिया नहीं है बल्कि अपनी क्षमताओं को पहचानने और आंतरिक खुशी का साधन भी है। उन्होंने उन क्षमताओं को पहचान कर उद्यमिता से जोड़ने के लिए कहा। उद्यमिता एक आसान कार्य नहीं है। हमें किसी भी कार्य को करने से पहले उसके प्रति जागरूक होना अति आवश्यक है। शिक्षा में आवश्यक परिवर्तन लाने के लिए नवीन विचारों की आवश्यकता है। उन्होंने छात्राओं को बताया कि साक्षरता और शिक्षा के अन्तर होता है। मंच संचालन तनीषा पी.एचडी. छात्रा द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम की प्रबंधक एवं विभागाध्यक्ष प्रोफेसर वरुणा तेहलान दहिया ने कहा कि यह समय की आवश्यकता है कि हम शिक्षकों को केवल पढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि नई दुनिया के लिए तैयार कर रहे हैं। यह प्रक्रिया एक नई कहानी, प्रभाव, साहस और दूरदृष्टि का निर्माण करती है। इस कार्यक्रम का सफल संयोजन डॉ. सुशील कुमार द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. अनु बल्हारा (डीन, शिक्षा विभाग), अंशु भारद्वाज, समन्वयक अधिकारी , प्रो. प्रिया ढींगरा, प्रो. सरला, प्रो. रीना, सहित सभी संकाय सदस्य एवं समस्त छात्राएं उपस्थित रही।फोटो कैप्शन :-01 प्रतिभागियों को संबोधित करते वक्ता .02 कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागी।

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