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मैट्रिक परीक्षा छूटी तो पटना के मसौढ़ी में छात्रा ने दी जान, देर से पहुंचने पर नहीं मिली थी एंट्री...

यह समाचार अत्यंत दुःखद और हृदय विदारक है। एक परीक्षा में देर से पहुँचने के कारण किसी छात्रा को प्रवेश न मिलना और उसके बाद इतना बड़ा कदम उठा लेना, हमारी व्यवस्था और संवेदनशीलता दोनों पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हैं और दिवंगत छात्रा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। शिक्षा का अधिकार केवल नियमों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें मानवीय संवेदनशीलता भी होनी चाहिए। सड़क जाम या आकस्मिक परिस्थितियों में पहुँची छात्रा को थोड़ी मोहलत देकर परीक्षा में शामिल होने का अवसर देना चाहिए था।
हम प्रशासन एवं शिक्षा विभाग से मांग करते हैं कि—
आपात परिस्थितियों में छात्रों के लिए स्पष्ट और मानवीय दिशा-निर्देश बनाए जाएँ।
परीक्षा केंद्रों पर काउंसलिंग और हेल्प डेस्क की व्यवस्था हो।
भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु जिम्मेदारी तय की जाए।
साथ ही, हम सभी विद्यार्थियों से भी अपील करते हैं कि किसी भी असफलता या बाधा को जीवन का अंत न समझें। जीवन अनमोल है, हर समस्या का समाधान होता है। कठिन समय में परिवार, शिक्षकों और मित्रों से बात करें — चुप न रहें।

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