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जालौन में स्वास्थ्य व्यवस्था बेहाल आयुष्मान आरोग्य मंदिर बने शोपीस महीनों से डॉक्टर गायब

राजू पाटकार

जालौन। जनपद जालौन के ब्लॉक जालौन अंतर्गत संचालित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में स्वास्थ्य सेवाएँ पूरी तरह चरमराती नज़र आ रही हैं। ग्रामीणों के अनुसार ये आरोग्य मंदिर अब इलाज के केंद्र नहीं, बल्कि ताले और खाली कमरों के शोपीस बनकर रह गए हैं। महीनों तक डॉक्टरों की मौजूदगी नहीं होती और स्टाफ भी नदारद रहता है, जिससे ग्रामीणों को सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि गर्भवती महिलाएँ, बुजुर्ग, बच्चे और सामान्य रोगी इलाज के लिए भटकने को मजबूर हैं। सरकारी इलाज न मिलने के कारण उन्हें निजी चिकित्सकों के पास जाना पड़ रहा है, जिससे गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

सूत्रों के हवाले से यह भी गंभीर आरोप सामने आए हैं कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के इंचार्ज की मिलीभगत से डॉक्टरों व स्टाफ को संरक्षण दिया जा रहा है। आरोप है कि उपस्थिति पंजिका और व्यवस्था कागजों में दुरुस्त दिखाई जाती है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। इस लापरवाही ने शासन की आयुष्मान भारत योजना की साख पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन को शिकायत भेजकर पूरे प्रकरण की खुली (ओपन) एवं निष्पक्ष जाँच कराने की माँग की गई है। शिकायत में बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, उपस्थिति पंजिका और मौके पर फील्ड निरीक्षण के आधार पर जाँच कराने तथा दोषी डॉक्टरों, स्टाफ और संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की माँग की गई है।

अब बड़ा सवाल यह है कि
जब सरकार गाँव-गाँव स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने का दावा कर रही है, तो जालौन के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर इलाज आखिर कब मिलेगा

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