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छूटा छेड़ा, समाज ही इलाज पहल

पहले Divorce होते कम, समाज के 5 वडिलो के ऑर विवाहित को सुना जाता.
Court नहीं जानती की कौन पक्ष सही है, Advocate और गवाह गुमराह so many case, मुदत लम्बी. मा बच्चा लेती है, Phycology कहती की मा competition के लिए तैयार नहीं कर शकती., पिता की जरुरत होती है,
दहेज़ जैसी कलम पुलिस के पास बहोत case, और वो लड़के वाले की सच्चाई जानने के बावजूद क्या करे.
1 महीने मै Divorce के case ज्यादा.
कुछ स्वाध्यई पांडुरंग, ॐ शांति, दादा भगवान, राधा स्वामी etc सत्संगी आध्यात्मिक गुरु से बाते जानते है पर दामाद या बहु के प्रति नज़रिया बदल जाता है घर आके,
लड़के और लड़की के Family की सोच अपने बेटे बेटी हो तो ये अल्फाज़ कुछ काम के लिखें मैंने.
नहीतो Family Court रात को चलाने पड़ेगी, Future Case Calculation हिसाब से.

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